कबीर का अंदाज ही कुछ ऐसा है कि कोई भी उसकी बात टाल नहीं पाती। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए भी उसने प्रोफेसर को डिनर के लिए मना ही लिया। तीन दिन का इंतजार अब और भी बेचैन कर रहा है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में यह अनोखा लगाव देखने को मिलता है जो दिल को छू लेता है। सच में प्यार की शुरुआत ऐसे ही होती है।
सफेद कोट में आइवी जितनी सहज लगती हैं, काले पोशाक में उतनी ही खूबसूरत। कैम्पस में चलते हुए उनका हर अंदाज किसी फिल्म दृश्य से कम नहीं लगता। फोन पर बात करते हुए भी उनकी आंखों में एक अलग ही चमक है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात के इस दृश्य ने मुझे बहुत प्रभावित किया। प्यार में इंसान कैसे बदलता है, यह बखूबी दिखाया गया है।
कबीर ने तीन दिन बाद मिलने की बात कही, शायद वह आइवी के लिए कुछ खास योजना बना रहा होगा। भाषण के बाद का जश्न सिर्फ बहाना है, असल मकसद तो दिल की बात कहना है। वैसे भी जब प्यार होता है तो बहाने ढूंढने नहीं पड़ते। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम साबित होगा। मुझे उनका मिलना बहुत भाया।
आवाज़ में जो लाइनें बोली गईं, वे सीधे दिल पर वार करती हैं। अंधेरी गली से निकलकर रोशनी में आने जैसा है प्यार। नैना वर्मा का किरदार बहुत गहराई से लिखा गया है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे संवाद मिलना आम बात नहीं है। हर शब्द में दर्द और उम्मीद दोनों झलकती हैं। सचमुच बहुत खूबसूरत कल्पना है।
अस्पताल जैसे गंभीर जगह पर भी कबीर का मजाकिया अंदाज देखने लायक है। वह बीमार होकर भी आइवी को प्रभावित करने की कोशिश करता है। यह जोड़ी बहुत जचती है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात के प्रशंसकों को यह जोड़ी बहुत पसंद आएगी। माहौल हल्का फुल्का है पर भावनाएं गहरी हैं। देखते रहने का मन करता है।
काले पोशाक और चश्मे में नैना वर्मा का रूप कातिलाना है। कैम्पस में चलते समय उनका आत्मविश्वास साफ झलकता है। हर कदम पर लगता है कि वह किसी राज की तलाश में हैं। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में वस्त्र चयन पर खासा ध्यान दिया गया है। उनका हर रूप कहानी को आगे बढ़ाता है। सच में तारीफ के काबिल है।
आइवी ने भाषण की तैयारी का बहाना बनाया, पर कबीर मानने वाला नहीं था। उसे पता है कि उसे कैसे मनाना है। यह जिद ही तो प्यार की निशानी है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं। रिश्तों की बारीकियों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। मुझे यह संवाद बहुत अच्छा लगा।
जब नैना वर्मा कैम्पस में चलती हैं, तो पुरानी महाविद्यालय की यादें ताजा हो जाती हैं। पेड़ पौधे और रास्ते सब कुछ परिचित लगता है। वहां का माहौल बहुत सुकून भरा है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात ने मुझे फिर से छात्र जीवन की ओर खींच लिया है। ऐसे दृश्य देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। बहुत ही सुंदर दृश्य है।
कबीर जब मुस्कुराता है तो लगता है सब कुछ ठीक हो जाएगा। अस्पताल के बिस्तर पर भी उसका हौसला बुलंद है। वह आइवी के लिए कुछ भी कर सकता है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का नायक सच में दिल जीत लेता है। उसकी अदाओं में एक अलग ही जादू है। दर्शक उससे नफरत नहीं कर सकते।
तीन दिन बाद क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। क्या आइवी अपने दिल की सुनेंगी या कर्तव्य में रहेंगी? कबीर की योजना क्या है? (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का अगला भाग देखने के लिए मैं बेताब हूं। कहानी में अब रोमांच बढ़ने वाला है। बस यही उम्मीद है।