आदित्य सिंहानिया का गुस्सा सिर्फ गुस्सा नहीं था, उसके पीछे तीन साल का दर्द छिपा था। जब उसने कहा कि वो हर रात उसकी तस्वीरें देखता रहा, तो रोंगटे खड़े हो गए। नैना वर्मा की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे दृश्य देखकर नेटशॉर्ट मंच पर लगातार देखना पड़ा। कबीर के बीच में आने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। अभिनय बहुत शानदार था।
नैना वर्मा ने साफ कर दिया कि सब कुछ खत्म हो चुका है। एक साल बाद मिलकर आदित्य का ये व्यवहार बिल्कुल सही नहीं लगा। किसी के खाने में खलल डालना तमीज की बात नहीं है। कबीर ने भी बहुत संभल कर बात की। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की कहानी में ये ट्विस्ट बहुत तेज था। अभिनय इतना असली लगा कि मैं खुद को रोक नहीं पाई। हर पल नया मोड़ ले रहा था।
बिना बुलाए आ जाना और बीच में बोलना, आदित्य सिंहानिया की हद से ज्यादा अधिकार जताने की आदत दिखाता है। नैना ने जब कहा कि वो उसकी औरत नहीं है, तो आदित्य टूट गया। ये नाटक दृश्य नहीं असली जिंदगी का दर्द लग रहा था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात देखते वक्त लगा कि सब किरदार अपने रोल में पूरी तरह फिट हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे शो मिलना दुर्लभ है।
कबीर ने बहुत तमीज से समझाने की कोशिश की लेकिन आदित्य को गुस्सा नहीं रुका। सिंहानिया ग्रुप के वारिस की तहजीब का सवाल जब उठा तो माहौल गरम हो गया। नैना वर्मा बीच में फंस गई। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ये टकराव सबसे बेहतरीन हिस्सा था। संवाद की अदायगी इतनी दमदार थी कि सांस रोक कर देखना पड़ा। सब कुछ बहुत असली लगा।
आदित्य ने बताया कि वो तीन साल तक नैना को ढूंढता रहा। कुत्ते की तरह हर रात तस्वीरें देखता रहा। ये सुनकर नैना की आंखों में आंसू आ गए होंगे। इतनी बेरहमी कैसे हो सकती है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की ये लाइन दिल पर चोट कर गई। नेटशॉर्ट मंच पर इतनी गहराई वाली कहानी कम ही मिलती है। हर पल दर्दनाक था।
एक साल पहले सब खत्म हो चुका था, फिर भी आदित्य सिंहानिया को ये मानने में दिक्कत हो रही है। नैना वर्मा की आजादी पर सवाल उठाना गलत है। कबीर बीच में आया तो उसे भी सुनना पड़ा। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में रिश्तों की ये उलझन बहुत गहराई से दिखाई गई है। हर भाग के बाद अगला देखने का मन करता है। कलाकार लाजवाब हैं।
गुस्से के पीछे छिपा दर्द जब आदित्य ने दिखाया तो सब चुप हो गए। वो पूछ रहा था कि उसने तुम्हें क्या दे दिया जो तुम मेरे साथ बेरहम हो गई। नैना वर्मा कोई जवाब नहीं दे पाई। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का ये दृश्य यादगार बन गया। नेटशॉर्ट मंच पर चित्र की गुणवत्ता और ध्वनि भी बहुत अच्छी थी। अनुभव बहुत शानदार रहा।
तमीज में रहो जब नैना ने कहा तो आदित्य का गुस्सा सातवें आसमान पर था। कबीर को मुंह बंद रखने को कहना उसकी निराशा दिखाता है। सिंहानिया समूह के वारिस का घमंड टूट रहा था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में संवाद बहुत भारी थे। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसी सामग्री को देखने का अनुभव बहुत आसान रहा। सब कुछ बढ़िया था।
खाने की मेज पर ये लड़ाई किसी जंग से कम नहीं थी। आदित्य सिंहानिया का बिना बुलाए आना और नैना वर्मा का गुस्सा होना स्वाभाविक था। कबीर बेचारा बीच में फंस गया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की मंच सजावट भी बहुत असली लगी। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे कार्यक्रम देखकर सप्ताहांत का मजा दोगुना हो गया। माहौल बहुत तनावपूर्ण था।
आदित्य ने पूछा कि वो इतनी बेरहम कैसे हो सकती है। नैना की चुप्पी ने सब कुछ कह दिया। कबीर चुपचाप देखता रहा। ये तनाव आगे क्या रूप लेगी ये देखना बाकी है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का अंत बहुत तगड़ा था। नेटशॉर्ट मंच पर अगला भाग तुरंत चला लिया मैंने। कहानी आगे क्या होगी।