नैना की आंखों में वो दर्द साफ दिख रहा था जब वो स्कार्फ को देख रही थी। उसे पता था कि आदित्य उसे इस्तेमाल कर रहा है, फिर भी वो चुप रही। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे मोड़ दिल तोड़ देते हैं। उसका चुपचाप चले जाना ही सबसे बड़ा सबूत है कि वो अब इस रिश्ते में नहीं रहना चाहती थी।
आदित्य को शर्म आनी चाहिए। सोनम के लिए नैना की मेहनत चुराना कितना गलत है। लैपटॉप का पासवर्ड उसका जन्मदिन था, ये बात दिखाती है कि नैना उसे कितना प्यार करती थी। पर बदले में उसे बस इस्तेमाल किया गया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात ने रिश्ते की कड़वी सच्चाई दिखाई है। देखकर गुस्सा आता है।
जब आदित्य ने वो गुलाबी सूटकेस देखा, तब उसे अहसास हुआ कि नैना वापस नहीं आएगी। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का ये दृश्य सबसे भावुक था। वो भागकर उसके पीछे जाना चाहता था, पर शायद बहुत देर हो चुकी थी। कभी कभी गलतियां सुधारी नहीं जा सकतीं। सन्नाटा सब बता रहा था।
सोनम को लगता है सब उसे मिलना चाहिए, चाहे वो नैना का शोधप्रबंध ही क्यों न हो। आदित्य भी उसकी बात मानकर गलत कर रहा है। ऐसे किरदार देखकर गुस्सा आता है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात पर ऐसे नाटक देखना लुभावना हो जाता है, हर कड़ी में नया मोड़ है। कहानी बहुत गहरी है।
लैपटॉप अनलॉक करते वक्त आदित्य के चेहरे के भाव देखने लायक थे। पासवर्ड उसका जन्मदिन था, मतलब नैना की दुनिया वही था। पर उसने इस भरोसे को तोड़ दिया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में भरोसे और धोखे की कहानी बहुत गहराई से दिखाई गई है। दिल दहल गया।
नैना ने सात साल वहीं बिताए, पर अब वो चुपचाप चली गई। उसने बहस नहीं किया, बस अपना रास्ता चुना। ये उसकी ताकत है। आदित्य को अब अकेले रहने का समय मिल गया है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात कहानी में जो ठंडक है वो कमाल की है। हर कोई इसे पसंद करेगा।
फोन पर आदित्य की आवाज़ में वो अकड़ और नैना की खामोशी। वो जानती थी कि बहस का कोई फायदा नहीं। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात के संवाद बहुत असली लगते हैं। जब वो कहती है कि उसे शोधप्रबंध लिखने की कोई जिम्मेदारी नहीं, तो दिल को ठेस लगती है। सच में बुरा लगा।
कार वाले दृश्य में सोनम और आदित्य की जुगलबंदी अलग थी, पर वो नैना के लिए जहर थी। आदित्य को लगा वो सब संभाल लेगा, पर उसने नैना को खो दिया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की वीडियो गुणवत्ता और अभिनय नेटशॉर्ट मंच पर काफी अच्छी है। मज़ा आ गया देखकर।
आदित्य की आंखों में वो झटका जब उसे सूटकेस दिखा। उसे समझ आ गया कि नैना सिर्फ शोधप्रबंध नहीं, अपना प्यार भी छोड़ गई है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे मोड़ बार बार देखने को मिलते हैं। ये कहानी बताती है कि किसी को तय समझना कितना महंगा पड़ सकता है। सच्ची कहानी।
इस लघु फिल्म ने कम समय में बहुत बड़ी कहानी कह दी। नैना का सब्र और आदित्य की गफलत। अंत में जब वो कमरे में अकेला खड़ा था, तो सन्नाटा चीख रहा था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात जैसे सामग्री के लिए नेटशॉर्ट सर्वश्रेष्ठ मंच है। हर किसी को ये देखना चाहिए। बहुत पसंद आया।