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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां10एपिसोड

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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

महारानी का अटूट साहस

महारानी का गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब सभी अधिकारी उसे घेरकर खड़े थे और मौत की धमकी दे रहे थे, तब भी उसने अपने चुने हुए पति का साथ नहीं छोड़ा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे सीन देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। अधिकारियों की कठोर धमकियों के बीच उसकी आवाज़ बिल्कुल नहीं कांपी। यह साहस सच में काबिले तारीफ है और हर पल तनाव बना हुआ था। दर्शक भी सांस रोके देख रहे थे।

खलनायक की अकड़

उस मोटे अधिकारी की अकड़ देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था। वह खुद को सबसे ऊपर समझ रहा था और झोऊ वंश की बड़ी बातें कर रहा था। लेकिन महारानी ने उसे बहुत करारा जवाब दिया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसे खलनायक किरदार हमेशा दर्शकों को चिढ़ाते हैं। अंत में प्रधानमंत्री के प्रवेश ने सबका मुंह बंद कर दिया और सन्नाटा छा गया। यह दृश्य बहुत ही शानदार था और यादगार बन गया।

प्रधानमंत्री का रौब

विश्वनाथ जी के प्रवेश ने पूरा माहौल एकदम बदल दिया। जैसे ही वह दरवाजे से अंदर आए, सभी ने डर के मारे सिर झुका लिए। उसकी चाल में एक अलग ही रौब और ताकत थी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे शक्तिशाली किरदारों का आगमन हमेशा कहानी में नया मोड़ लाता है। पंखा लेकर चलने वाला यह व्यक्ति सबका ध्यान खींच रहा था। अब देखना है कि वह किसका साथ देगा और फैसला क्या होगा।

प्रेम की गहराई

राजद्रोह का आरोप लगना कोई छोटी बात नहीं है। फिर भी महारानी ने साफ कह दिया कि वह अपने पति को हर कीमत पर बचाएगी। यह प्रेम कहानी बहुत गहरी लग रही है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों की यह मजबूती देखने लायक है। अधिकारी चिल्ला रहे थे कि सिर कलम कर दो, पर वह बिल्कुल डरी नहीं। ऐसे सीन बार-बार देखने का मन करता है और अच्छे लगते हैं।

शाही ठाठ बाठ

महल का माहौल बहुत ही भव्य और शाही बनाया गया है। दीयों की रोशनी और भारी पर्दे देखकर लगता है कि यह कोई बड़ा दरबार है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की निर्माण शैली ने मुझे हैरान कर दिया। कपड़ों की डिजाइन और गहने बहुत कीमती और सुंदर लग रहे थे। हर दृश्य एक तस्वीर की तरह सुंदर था। ऐसे शो देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा।

शब्दों का युद्ध

लाल पोशाक वाले अधिकारी ने सबसे पहले शोर मचाया। उसने कहा कि यह सजा के लायक है और कोई रहम नहीं होगा। लेकिन उसे क्या पता था कि महारानी कितनी ताकतवर है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे संवादबाजी के मुकाबले देखने में बहुत मजेदार लगते हैं। एक तरफ डर था और दूसरी तरफ गुस्सा था। यह टकराव बहुत ही रोमांचक था और देखने में मजा आया।

कहानी का मोड़

कहानी में लगातार हैरानी वाले मोड़ आ रहे हैं। पहले लगा कि अब तो पति का सिर कट जाएगा, फिर महारानी बीच में आ गई। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की पटकथा में ऐसे उतार-चढ़ाव दर्शकों को बांधे रखते हैं। फिर प्रधानमंत्री का आना और सबका चुप हो जाना। यह कहानी बहुत तेज है। हर सीन के बाद कुछ नया होता है और उत्सुकता बढ़ती है।

महारानी का हुकूमत

महारानी ने जब कहा कि यहां मेरी ही चलेगी, तो सबके होश उड़ गए। उसने पुराने महाराज का नाम लेने से भी मना कर दिया था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में महिला सशक्तिकरण का यह रूप बहुत प्रभावशाली लगा। वह किसी से डरने वाली नहीं थी। उसकी आंखों में आग थी। ऐसे किरदार निभाना आसान नहीं होता।

चुप्पी का मतलब

उस व्यक्ति ने जो राजकुमार का भेष बनाया था, वह शांत खड़ा था। उसे पता था कि महारानी उसे बचा लेगी। उनके बीच की समझ देखने लायक थी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे चुपचाप खड़े रहने वाले किरदार भी कहानी का हिस्सा बनते हैं। अब विश्वनाथ जी के आने से सब बदल जाएगा। उम्मीद है न्याय होगा और सच सामने आएगा।

देखने का मजा

इस मंच पर यह शो देखना बहुत सुकून देने वाला था। बिना किसी रुकावट के कहानी आगे बढ़ती गई। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ जैसे शो देखने का अनुभव हमेशा यादगार रहता है। हिंदी आवाज़ भी काफी साफ थी। संवाद समझने में आसान थे। मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं।