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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां67एपिसोड

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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

साजिश का जाल

इस दृश्य में तनाव साफ झलकता है जब सम्राट को पता चलता है कि शराब में नशा मिलाया गया था। मीरा की घबराहट और चाचा की बेबसी देखकर दिल दहल जाता है। बाहर खड़ी महिला की मुस्कान में छिपी खतरनाक चाल ने सबको हैरान कर दिया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर पल नया रहस्य बना रहता है और कहानी आगे बढ़ती है।

नीली साड़ी वाली की चाल

बाहर खड़ी नीली साड़ी वाली महिला की चालाकी देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने सोचा था कि सब कुछ उसकी योजना के अनुसार होगा, पर सम्राट की हिम्मत उसे पछतावा दिला सकती है। इस धारावाहिक (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। संवाद बहुत तीखे हैं और अभिनय लाजवाब है। दर्शक इस कला के कायल हो जाते हैं और बार-बार देखना चाहते हैं।

नशे का असर

सम्राट का तड़पना और मदद के लिए पुकारना किसी भी दर्शक को झकझोर सकता है। नशे की दवा ने न केवल शरीर को बल्कि माहौल को भी भारी कर दिया है। मीरा का रोते हुए बाहर जाना सबसे दर्दनाक पल था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसा दर्द बार-बार उभरता है। छायांकन ने इस पीड़ा को बहुत खूबसूरती से कैद किया है। दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं और आंखों में नमी ला देते हैं।

विश्वासघात की कहानी

जब कोई अपना ही धोखा दे तो क्या होता है, यह दृश्य वही बताता है। चाचा और मीरा के बीच की दूरी साजिश के कारण बढ़ती जा रही है। उस महिला की हंसी में जहर घुला हुआ है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे धोखे की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं। दर्शक हर कड़ी के बाद हैरान रह जाते हैं कि आगे क्या होगा। कहानी में गहराई है जो लोगों को जोड़े रखती है।

कमरे का सन्नाटा

कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि सांसों की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी। सम्राट की हालत देखकर लग रहा था कि अब सब खत्म हो गया है। पर उस महिला का प्रवेश नई कहानी की शुरुआत है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर दृश्य में एक नया रहस्य छिपा होता है। रोशनी और छाया का खेल बहुत प्रभावशाली लगा। माहौल बहुत गंभीर था और दर्शकों को बांधे रखता है।

मीरा की आंखों का डर

मीरा की आंखों में जो डर था, वह शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता। उसे लगा कि कोई उसे फंसा रहा है और वह सही भी थी। उसकी मासूमियत को हथियार बनाया गया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे भावनात्मक पल दर्शकों को रुला देते हैं। अभिनेत्री ने अपने किरदार को बहुत ही बखूबी निभाया है। हर भाव सही था और दिल को छू गया।

साजिशगर की जीत

उस महिला को लगा कि उसकी जीत पक्की है क्योंकि सम्राट खुद पर काबू खो बैठा था। उसने अपनी साड़ी संवारी और अंदर जाने की तैयारी की। पर क्या वह सच में जीत पाएगी? (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में कभी भी अंत अनुमानित नहीं होता। यह अनिश्चितता ही इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है। लोग इंतजार करते हैं कि आगे क्या होता है और कौन जीतता है।

परिधानों का संदेश

कपड़ों का उतारना और पहनना सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी था। जब सम्राट ने कपड़े पहनने को कहा, तो वह बचने की कोशिश थी। मीरा ने अपनी शर्म बचाने के लिए भागना चुना। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में छोटे-छोटे संकेत बड़ी कहानी कहते हैं। पोशाकें और गहने भी किरदार की स्थिति बताते हैं। डिजाइन बहुत अच्छे हैं और आंखों को सुकून देते हैं।

मदद की पुकार

सम्राट की आवाज़ में जो दर्द था, वह पूरे महल में गूंज रहा था। कोई उसकी मदद को नहीं आया, यह अकेलेपन का सबसे बड़ा प्रतीक था। वह टूटता हुआ महसूस हो रहा था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में शक्तिशाली लोग भी कितने असहाय हो सकते हैं, यह दिखाया गया है। यह दृश्य बहुत ही दिल को छू लेने वाला था। सच्चाई कड़वी है पर जरूरी है।

अंत की शुरुआत

जब वह महिला अंदर आई और बोली कि सभी मर्द एक जैसे होते हैं, तो लगता है कि बदला लेने का समय आ गया है। यह सिर्फ एक रात नहीं, बल्कि एक युद्ध की शुरुआत है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर संवाद में गहराई है। दर्शक इस कहानी का हिस्सा बनकर रह जाते हैं और आगे का इंतजार करते हैं। कलाकार बेहतरीन हैं और मेहनत दिखती है।