मीरा का दरवाजे पर छिपकर देखना और रुद्र कुमार का अचानक आ जाना, इस दृश्य में जो तनाव है वह कमाल का है। महारानी को ढूंढते हुए रुद्र कुमार की बेचैनी साफ दिख रही है। मीरा बहाने बना रही है कि महारानी व्यस्त हैं, पर रुद्र कुमार इतनी आसानी से मानने वाले नहीं हैं। आधी रात को जरूरी काम वाली बात पर शक होना लाजिमी है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। रात के समय महल का माहौल और भी रहस्यमयी लग रहा है।
अचानक पुराने दृश्य में तालाब वाला सीन दिखाकर कहानी में नया मोड़ दिया गया है। आंखों पर पट्टी वाली महिला कौन है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। रुद्र कुमार का कहना कि मैं तुम्हें पकड़ने आई, यह संवाद बहुत गहरा है। शायद मीरा ही महारानी हैं और कुछ छिपा रही हैं। पर्दे पर ऐसे नाटक देखना बहुत रोमांचक होता है। हर पल नया रहस्य सामने आ रहा है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में यह बदलाव बहुत अच्छा लगा।
कमांडर रुद्र कुमार के चेहरे के भाव देखकर लग रहा है कि वह मीरा पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। वह बार बार पूछ रहे हैं कि आधी रात को कौन सा जरूरी काम है। मीरा की घबराहट साफ झलक रही है जब वह उन्हें कल आने को कहती हैं। यह खेल कब तक चलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। बड़ों की बात कहकर मीरा टाल रही हैं पर रुद्र कुमार नहीं रुकने वाले। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में किरदारों का मेलजोल बहुत अच्छा है।
रात के समय महल के बाहर का नज़ारा बहुत सुंदर और रहस्यमयी बनाया गया है। लाल खंभे और जालीदार दरवाजे पुराने जमाने की याद दिलाते हैं। मीरा और रुद्र कुमार के बीच की बहस में जो तीखापन है वह कहानी को आगे बढ़ाता है। महारानी का पता न लगना एक बड़ी पहेली बन गई है। क्या सच में महारानी व्यस्त हैं या कुछ और चल रहा है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की मंच सजावट बहुत प्रशंसनीय है।
मीरा ने रुद्र कुमार को टालने के लिए जो बहाने बनाए वह काफी होशियारी भरे थे। वह जानती हैं कि अगर रुद्र कुमार अंदर गए तो सब खुल जाएगा। उसका पतिदेव देव कहना भी एक चाल हो सकती है। रुद्र कुमार ने तारीफ की कि तुम काफी होशियार हो, इसका मतलब वह सब समझ चुके हैं। अब आगे क्या होगा यह जानने की बेताबी है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं।
इस कड़ी में संवाद बहुत दमदार हैं खासकर जब रुद्र कुमार सवाल पूछते हैं। मीरा का जवाब देना और फिर घबरा जाना अभिनय का कमाल है। महारानी को मुझसे बात करनी है वाली लाइन में अधिकार झलकता है। दोनों के बीच की नोकझोंक देखने में बहुत मजेदार लग रही है। जल्दी से मुझे बताओ वाली बात पर जो तनाव है वह लाजवाब है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की डबिंग भी बहुत प्रभावशाली है।
महारानी का किरदार अभी तक सामने नहीं आया पर चर्चा में बनी हुई हैं। मीरा शायद उनकी जगह कुछ कर रही है या उनका राज जानती है। रुद्र कुमार को पूरे महल में ढूंढना यह दिखाता है कि महारानी का मिलना जरूरी है। तालाब वाले दृश्य में जो महिला थी क्या वही महारानी हैं। यह पहेली सुलझना अभी बाकी है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर किरदार का अपना महत्व है।
मीरा की आंखों में डर और रुद्र कुमार की आंखों में शक साफ दिख रहा है। जब वह कहती हैं कि महारानी व्यस्त हैं तो आवाज में कंपन है। रुद्र कुमार का गुस्सा और हैरानी दोनों एक साथ देखने को मिल रहे हैं। यह रिश्ता क्या है और क्यों छिपाया जा रहा है। दर्शक के रूप में यह जानना चाहते हैं कि सच क्या है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में भावनात्मक परत बहुत गहरी है।
कड़ी के अंत में रुद्र कुमार का जल्दी से मुझे बताओ कहना और मीरा का चुप रहना। यह अंत दर्शकों को अगली कड़ी के लिए मजबूर कर देता है। बड़ों की काम की बात कहकर टालना अब काम नहीं आएगा। रुद्र कुमार अब सच जानने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। कहानी की रफ्तार बहुत तेज हो गई है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ का अगला भाग देखने की बेताबी है।
मीरा और रुद्र कुमार की पोशाकें बहुत ही शानदार और पारंपरिक हैं। मीरा के गहने और बालों की सजावट उस जमाने की रानियों जैसी लगती है। रुद्र कुमार का नीला वस्त्र और ताज उनकी कमांडर वाली पहचान बताता है। मंच सजावट में बारीकियों का ध्यान रखा गया है। ऐसे दृश्य देखना एक अलग ही अनुभव है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की निर्माण गुणवत्ता बहुत अच्छी है।