एक्शन सीन्स बहुत शानदार थे। कलावती का तलवार चलाने का अंदाज देखते ही बनता है। जब उसने लाल पोशाक वाले राजकुमार को बचाया, तो माहौल बदल गया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं। हथियारों की आवाज़ और पृष्ठभूमि संगीत ने तनाव को बढ़ा दिया। वेशभूषा भी बहुत विस्तृत है।
लाल पोशाक वाले युवक की आँखों में कलावती के लिए अलग ही चमक थी। खतरे के बीच भी उसने सुंदरता की तारीफ कर दी। यह रोमांस और एक्शन का अनोखा संगम है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ के किरदार बहुत गहरे हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज से ही कहानी समझ आ जाती है। ऐसा लगा जैसे वे एक दूसरे को पहले से जानते हों।
परिवार की बातचीत में छिपी राजनीति साफ झलकती है। हरे और लाल पोशाक वाली महिला चाहती हैं कि सब खुश रहें, पर सामने खड़े लोग चुप हैं। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों की जटिलता दिखाई गई है। पीले वस्त्र वाले राजा के चेहरे पर संतोष है, पर आँखों में सवाल हैं। यह नाटक धीरे धीरे बढ़ रहा है।
सफेद पोशाक वाले व्यक्ति ने कलावती को उपहार की तरह सौंप दिया। आज से यह तुम्हारी हुई, यह डायलॉग बहुत भारी था। एक योद्धा को इस तरह देना खतरनाक हो सकता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ आते रहते हैं। कलावती के चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं थी, जो उसकी वफादारी दिखाता है। आगे क्या होगा देखना बाकी है।
महल का सजावट बहुत भव्य है। लाल पर्दे और सोने के बने ड्रेगन दीवारों पर चमक रहे हैं। रंगों का उपयोग कहानी के मूड के अनुसार किया गया है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की दृश्य शैली बहुत अच्छी है। कलावती का कवच और रेशमी कपड़ों का अंतर आँखों को सुकून देता है। हर दृश्य एक चित्र जैसा लगता है।
कलावती सिर्फ एक रक्षक नहीं, बल्कि एक पहेली है। उसने अपना नाम बताया पर उसके इरादे अभी भी छिपे हैं। लाल पोशाक वाले को उस पर भरोसा हो गया है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में किरदारों की परतें धीरे धीरे खुलती हैं। उसकी चुप्पी शोर से ज्यादा असरदार है। दर्शक के रूप में हमें उसका साथ चाहिए।
अंत में हल्के भूरे पोशाक वाले बुजुर्ग का चेहरा देखकर दुख हुआ। आप अकेले रह गए हो, यह लाइन दिल को छू गई। सत्ता के खेल में कोई हारता है तो कोई जीतता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में भावनात्मक पल भी हैं। उनकी आँखों में निराशा साफ दिख रही थी। यह दृश्य कहानी की गहराई को दिखाता है।
कहानी की रफ़्तार बहुत तेज है। लड़ाई, बचाव, परिचय और फिर परिवार का नाटक, सब कुछ जल्दी हो गया। कहीं भी बोरियत नहीं होती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ को देखने का अनुभव रोमांचक है। नेटशॉर्ट ऐप पर वीडियो की गुणवत्ता भी साफ थी। छोटी कड़ी में पूरी कहानी समेट दी गई है।
खतरे के बीच भी मजाकिया अंदाज देखने को मिला। राजकुमार का डरना नहीं बल्कि तारीफ करना हास्यपूर्ण था। ऐसे किरदार कहानी को हल्का करते हैं। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में गंभीरता और हंसी का संतुलन है। सफेद पोशाक वाले दोस्त की एंट्री भी दिलचस्प थी। यह जोड़ी आगे कई समस्याएं खड़ी करेगी।
कुल मिलाकर यह ऐतिहासिक नाटक बहुत प्रभावशाली है। डबिंग की गुणवत्ता अच्छी है और भावनाएं सही जगह पर लगती हैं। पात्रों के बीच की जुगलबंदी देखने लायक है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ को हर उस व्यक्ति को देखना चाहिए जो नाटक पसंद करता है। अगले भाग का इंतजार अब से शुरू हो गया है।