राजा का मछली पकने का इंतज़ार करना बहुत हास्यास्पद लगा। पूरी सभा में तनाव था लेकिन उन्हें बस अपनी भूख की पड़ी थी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे हास्य दृश्य देखकर हंसी नहीं रुकती। मंत्री की धमकियां भी बेकार गईं जब राजा चलने को तैयार हो गया। असली राजा कौन है यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है। दर्शकों को यह पसंद आएगा। बहुत अच्छा लगा।
सभा में अचानक नकली राजकुमार का आरोप लगना बहुत बड़ा मोड़ था। लाल पोशाक वाले अधिकारी घबरा गए थे। दृश्य में दिखाया गया है कि कैसे सत्ता का खेल खतरनाक हो सकता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में हर पल नया मोड़ आता है। पंखे वाले व्यक्ति की चालाकी देखकर हैरानी हुई। सब लोग चुपचाप खड़े थे। कोई हिला नहीं।
ग्रे पोशाक वाले मंत्री को सज़ा देने का तरीका बहुत अजीब था। पहले बीस कोड़े फिर चालीस की बात हुई। यह सौदेबाजी देखकर लगा कि दरबार में गंभीरता कम है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे संवाद बहुत मज़ेदार लगते हैं। रुद्र सिंह जी की माफी मांगने का अंदाज़ भी देखने लायक था। सब हैरान थे। बहुत अजीब था।
महारानी का जब मुंह से हाथ निकला तो लगा उन्हें विश्वास नहीं हो रहा। राजा का व्यवहार बहुत लापरवाह था। ऐसे में राज्य कैसे चलेगा यह सवाल उठता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में पात्रों के भाव बहुत गहरे हैं। पृष्ठभूमि का संगीत और सजावट बहुत भव्य लग रही थी। कमरे की रोशनी अच्छी थी। सब देख रहे थे।
जिसके हाथ में पंखा था वह सबसे खतरनाक लग रहा था। उसने बिना हिले सबको डरा दिया। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में खलनायक कौन है पता नहीं चलता। विश्वनाथ जी का नाम सुनकर सब चौंक गए थे। यह नाटक बहुत रोचक बन गया है। सब देख रहे थे। डर लग रहा था।
अंत में लाल पोशाक वाला अधिकारी बाहर भागता हुआ दिखा। उसे डर था कि कहीं दावत खत्म न हो जाए। यह भागमभाग बहुत हास्य लग रही थी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हास्य और रोमांच का मिश्रण अच्छा है। रात का दृश्य बहुत सुंदर तरीके से फिल्माया गया था। बाहर के दीये जल रहे थे। रात का समय था।
शुरू में शादी की तारीख पक्की करने की बात हो रही थी। लेकिन बीच में ही सब बदल गया। राजा का ध्यान नहीं था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रोमांस से ज्यादा राजनीति दिख रही है। महेंद्र सिंह का धन्यवाद करना भी एक नाटक लग रहा था। सब कुछ संदेह के घेरे में है। कोई नहीं जानता। सच क्या है।
पूरा दरबार तनावपूर्ण था लेकिन राजा मज़ाक कर रहे थे। यह विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। लाल कार्पेट और परदे बहुत सुंदर थे। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की निर्माण गुणवत्ता बहुत अच्छी है। कपड़ों की नक्काशी और गहने बहुत कीमती लग रहे थे। हर पात्र अपनी जगह सही है। सब सजे थे। बहुत सुंदर।
बार बार सिर कलम करने की धमकी दी जा रही थी। यह सुनकर डर लग रहा था। लेकिन फिर भी लोग हंस रहे थे। यह दृश्य बहुत अजीब है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में मौत का खेल चल रहा है। राजा का कहना कि उसका कोई काम नहीं है हैरान करने वाला था। सब चुप थे। दीवारें सुंदर थीं। डर का माहौल।
राजा ने कहा कि यह पुराने दोस्त हैं। लेकिन क्या वे सच्चे हैं यह पता नहीं। विश्वास करना मुश्किल हो गया है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में धोखा हर कदम पर है। ग्रे पोशाक वाले ने भी अपना पक्ष रखा। अंत में सब शांत हो गया लेकिन समस्या बाकी है। आगे क्या होगा। सब सोच रहे।