PreviousLater
Close

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां21एपिसोड

3.0K6.0K

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

नौकरानी की हैरानी

इस दृश्य में नौकरानी की प्रतिक्रिया देखकर हंसी नहीं रुक रही है। महारानी को पैर में दर्द हुआ और चाचा उनकी मालिश कर रहे थे, लेकिन बाहर खड़ी लड़की ने सब कुछ गलत समझ लिया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे हास्य दृश्य बहुत हैं। आवाज़ें सुनकर उसका चेहरा देखने लायक था। असल में सिर्फ मालिश हो रही थी पर उसे लगा कुछ और ही चल रहा है। यह गलतफहमी पूरे माहौल को हल्का-फुल्का बना देती है। दर्शकों को यह पसंद आएगा। बाहर की शांति और अंदर की हलचल ने मजा बढ़ा दिया। नौकरानी के संदेह ने कहानी में नया मोड़ दिया। वह बार-बार दरवाजे के पास जाती है और कान लगाती है। यह उत्सुकता दर्शकों को भी बांधे रखती है।

चाचा और भतीजी का खेल

महारानी और चाचा के बीच का आपसी लगाव बहुत दिलचस्प है। वह जानबूझकर पैर दर्द का बहाना करती हैं ताकि वह उनके करीब आ सकें। यह चालाकी दर्शकों को बहुत पसंद आ रही है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों की यह बारीकी देखने मिलती है। चाचा का घबराहट में आना और फिर मालिश करना स्वाभाविक लगा। महारानी की अदाएं लाजवाब हैं। वह कैसे अपनी बात मनवाती हैं, यह देखना रोचक है। पुराने जमाने का माहौल भी बहुत सुंदर बनाया गया है। कपड़े और गहने बहुत भारी और सुंदर हैं। यह शाही ठाठ दिखाता है। उनकी बातचीत में जो मिठास है, वह दिल को अच्छी लगती है।

पैर दर्द का बहाना

शुरू में लगा कि सच में चोट लगी है, लेकिन धीरे-धीरे पता चला कि यह सब एक योजना थी। महारानी बहुत चतुर हैं जो ऐसे बहाने बनाकर ध्यान खींचती हैं। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं। चाचा का भोलापन और उनकी चिंता असली लगती है। वह तुरंत दौड़कर आए और मदद की। यह दिखाता है कि वह उनकी कद्र करते हैं। संवाद बहुत ही मजेदार तरीके से लिखे गए हैं। हर संवाद में कुछ न कुछ छिपा है। महारानी की चालाकी और चाचा की सीधापन का टकराव देखने लायक है। यह जोड़ी स्क्रीन पर बहुत अच्छी लगती है।

मालिश का आनंद

जब चाचा पैर दबा रहे थे, तो महारानी के चेहरे का सुकून साफ दिख रहा था। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा आराम मिला है। यह संवाद थोड़ा शरारती लगता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे पल रोमांच बढ़ाते हैं। चाचा को लगा कि शायद दर्द हो रहा है, पर उन्हें सुकून मिल रहा था। यह द्वंद्व दृश्य को और भी दिलचस्प बनाता है। कलाकारों की अभिनय क्षमता यहाँ बहुत अच्छी लगती है। महारानी की आंखें बंद करके आराम लेना बहुत सुंदर लगा। चाचा का ध्यान से मालिश करना उनकी देखभाल दिखाता है। यह पल बहुत प्रेमपूर्ण और कोमल है।

बाहर खड़ी सहेली

दरवाजे के बाहर खड़ी लड़की का किरदार बहुत महत्वपूर्ण है। वह जो सुन रही थी, उससे उसकी कल्पनाएं गलत दिशा में जा रही थीं। उसे शर्म आ रही थी फिर भी वह सुनती रही। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में यह पात्र हास्य का कारण बना। उसने सोचा कि महारानी को फिर से वही चाहिए। उम्र के लोग अनुभवी होते हैं, यह उसकी टिप्पणी हंसाती है। बाहर का दृश्य और अंदर की हलचल का विरोधाभास मजेदार है। वह कपड़े लेकर खड़ी है और हैरान है। उसकी आंखें फैल जाती हैं जब उसे कुछ सुनाई देता है। यह दृश्य कहानी में हल्कापन लाता है।

संवादों की ताकत

हिंदी डबिंग में संवादों का चयन बहुत अच्छा हुआ है। जल्दी करो, जोर से दबाओ, जैसे संवाद माहौल को गर्म करते हैं। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की आवाज़ें किरदारों पर फिट बैठती हैं। महारानी की आवाज़ में नखरे हैं और चाचा की आवाज़ में गंभीरता। यह सुनने में बहुत प्राकृतिक लगता है। दर्शक डबिंग को भूलकर असली अभिनय मान बैठते हैं। यह तकनीक बहुत अच्छी है। आवाज़ के उतार-चढ़ाव ने भावनाओं को सही तरीके से पहुंचाया। हर शब्द स्पष्ट और प्रभावशाली है। यह दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है।

प्राचीन कमरे की सजावट

लकड़ी का टब, मोमबत्ती की रोशनी और पुराने जमाने के कपड़े सब कुछ बहुत सुंदर है। यह दृश्य एक महल जैसा लगता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में मंच सजावट पर ध्यान दिया गया है। रात का समय और शांति माहौल को प्रेमपूर्ण बनाती है। जब चाचा महारानी को उठाकर ले जाते हैं, तो पृष्ठभूमि बहुत अच्छी लगती है। यह दृश्य दर्शकों को उस युग में ले जाता है। कला निर्देशन बहुत प्रशंसनीय है। दीये की रोशनी में चेहरे के भाव और भी साफ दिखते हैं। अंधेरा और रोशनी का खेल बहुत खूबसूरत है।

महारानी का अभिनय

महारानी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री ने बहुत अच्छा काम किया है। उनके चेहरे के भाव बदलते रहते हैं। कभी दर्द, कभी सुकून, कभी शरारत। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में उनका प्रदर्शन देखने लायक है। वह कैसे चाचा को अपने वश में करती हैं, यह कला है। उनकी आंखों में चमक और मुस्कान दिल को छू लेती है। वह सिर्फ सुंदर नहीं हैं बल्कि होशियार भी हैं। यह किरदार बहुत यादगार बना है। उनके कपड़े और शृंगार भी बहुत अच्छे हैं। हर अदा में शाहीपन झलकता है।

चाचा की घबराहट

चाचा का किरदार बहुत भोला और सीधा लगता है। जब महारानी गिरती हैं, तो वह तुरंत दौड़ते हैं। उनकी चिंता असली लगती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में यह रिश्ता दिखाना जरूरी था। वह मालिश करते समय भी सावधान रहते हैं कि कहीं दर्द तो नहीं हो रहा। उनका हैरान होना जब महारानी सुकून का अनुभव बताती हैं, वह मजेदार है। यह पात्र कहानी को आगे बढ़ाता है। उनकी पोशाक और बालों की सजावट भी अच्छी है। वह एक जिम्मेदार व्यक्ति की तरह व्यवहार करते हैं।

रोमांच और हास्य का मिश्रण

यह लघु नाटक प्रेम कहानी और हास्य का अच्छा मिश्रण है। न तो यह बहुत गंभीर है और न ही बहुत हल्का। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में संतुलन बनाए रखा गया है। दर्शक हंसते भी हैं और किरदारों के लिए फिक्र भी करते हैं। दृश्य देखना अच्छा लगता है। कहानी में नए मोड़ आते रहते हैं। यह दृश्य देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। ऐसे ही और दृश्य चाहिए। समय बिताने के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है। कहानी की गति बहुत सही है।