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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां51एपिसोड

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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पिता और पुत्र का भावुक पल

इस दृश्य में पिता और पुत्र के बीच का लगा देखकर दिल पिघल गया। जब पिताजी रो पड़ते हैं तो लगता है कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे पल बार-बार देखने को मिलते हैं। पुत्र का पिता को समझाना और फिर गले लगना बहुत ही प्यारा लगा। अंत में जब बात महारानी की शादी की होती है तो माहौल हल्का हो जाता है। यह कहानी देखने में बहुत मजेदार है।

शादी की अफवाहें

शुरू में लगा कि यह बहुत गंभीर दृश्य है लेकिन अंत में जो मोड़ आया वह कमाल का था। पुत्र ने जब महारानी के प्रेम की ताकत के बारे में बताया तो पिताजी का चेहरा देखने लायक था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसे हास्य पल जान डाल देते हैं। संवाद बहुत ही तीखे और मजेदार हैं। कलाकारों के अभिनय ने इस दृश्य को और भी बेहतर बना दिया है।

महल की सजावट और रंग

लाल रंग की सजावट और मोमबत्तियों की रोशनी ने इस दृश्य को बहुत ही शाही बना दिया है। पिता और पुत्र की बातचीत के बीच में जो वातावरण है वह बहुत ही सुंदर है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में दृश्य संयोजन पर खासा ध्यान दिया गया है। जब पुत्र अपने पिता को गले लगाता है तो पृष्ठभूमि में वो लाल पर्दे बहुत अच्छे लग रहे थे। कुल मिलाकर एक शानदार दृश्य।

संवादों की ताकत

संवादों की प्रस्तुति इतनी दमदार है कि हर शब्द दिल पर असर करता है। पिता का कहना कि बेटा बड़ा हो गया है, बहुत भावुक था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ के संवाद हमेशा याद रह जाते हैं। फिर अंत में वो दो दिन दो रात वाला मजाक सुनकर हंसी नहीं रुक रही थी। ऐसे धारावाहिक ही असली मनोरंजन करते हैं।

रिश्तों की बारीकियां

पिता और पुत्र के रिश्ते में जो झिझक और फिर अपनापन दिखा है वह बहुत ही असली लगता है। शुरू में पिता को यकीन नहीं हो रहा था कि बेटा उनकी इतनी फिक्र करता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों को बहुत गहराई से दिखाया गया है। बाद में जब बातचीत का रुख बदलता है तो हंसी आ जाती है। किरदारों के बीच का मेल लाजवाब है।

आंसू से हंसी तक

यह दृश्य भावनाओं का एक उतार चढ़ाव भरा सफर है। पहले पिताजी रो रहे हैं और फिर कुछ ही पलों में बातचीत का माहौल बदल जाता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं। पुत्र का पिता को तसल्ली देना और फिर खुद ही हंस पड़ना बहुत स्वाभाविक लगा। दर्शक भी इसमें खो जाता है।

महारानी का राज

सबको लगा कि यह शादी किसी और की है लेकिन असलियत कुछ और ही निकली। पुत्र ने जब महारानी के प्रेम के बारे में बताया तो सनसनी फैल गई। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी हमेशा आश्चर्य से भरी होती है। पिताजी का हैरान होना बिल्कुल जायज था। ऐसे दृश्य बार-बार देखने का मन करता है।

कलाकारों का जादू

दोनों कलाकारों ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। पिता के किरदार में जो दर्द और खुशी दोनों है वह साफ झलकती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ का पात्र चयन हमेशा सही रहता है। पुत्र के चेहरे के हावभाव भी बहुत भावपूर्ण हैं। जब वो इशारे में ताकत बताता है तो मजा आ जाता है।

दर्शकों का पसंदीदा

ऐसा लगता है कि यह दृश्य दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय होगा। भावना और हास्य का सही मिश्रण है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ को देखने वाले हर कड़ी का इंतजार करते हैं। पिता का रोना और फिर बेटे का समझाना दिल को छू लेता है। अंत वाला मजाक तो मजेदार तोहफा है।

पूरी कहानी का मजा

इस छोटे से वीडियो में पूरी कहानी का सार छिपा हुआ है। परिवार का प्यार और दरबार की चर्चाएं सब कुछ है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ जैसे कार्यक्रम देखने से दिन भर की थकान उतर जाती है। दृश्य की शुरुआत और अंत दोनों ही शानदार हैं। बिल्कुल वक्त बर्बाद नहीं होता ऐसी कहानी में।