PreviousLater
Close

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां59एपिसोड

3.0K5.9K

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

मछली बेचने वाला बेटा

यह दृश्य बहुत रोचक है जब सफेद पोशाक वाला व्यक्ति कहता है कि उसके पिता मछली बेचते हैं। राजा को यह बात हंसाती है लेकिन प्रधानमंत्री गुस्से में आ जाता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं। तलवारें निकलते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। रानी का हस्तक्षेप देखकर लगा कि अब बड़ा खुलासा होने वाला है। सैनिकों की वफादारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

रानी का साहस

जब सैनिकों ने हमला करने की ठानी तो रानी ने बीच में कदम रख दिया। उनकी आंखों में डर नहीं बल्कि आक्रोश था। यह श्रृंखला (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ सच में दिलचस्प है। पीले वस्त्र वाले राजा की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। प्रधानमंत्री की जल्दबाजी साफ दिख रही थी। ऐसे पल देखकर लगता है कि महल की दीवारों में कई राज छिपे हैं। हर संवाद में भारीपन है।

प्रधानमंत्री का गुस्सा

भूरे वस्त्र वाले प्रधानमंत्री का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। उन्होंने बिना सोचे समझे हमले का आदेश दे दिया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में खलनायक का किरदार बहुत मजबूत है। लाल पोशाक वाले अधिकारी ने भी रानी का साथ दिया। यह टकराव बहुत तेजी से बढ़ा। दर्शक के रूप में मैं हैरान था कि आखिर सच्चाई क्या है। मछली वाले बेटे का रहस्य अब खुलना बाकी है।

तलवारों का साया

जब सैनिकों ने तलवारें निकालीं तो पर्दे पर तनाव छा गया। लाल रंग के पर्दे और सुनहरी सजावट के बीच यह युद्ध जैसे थम गया हो। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ का यह भाग बहुत चरमसीमा लग रहा है। सफेद पोशाक वाले की मासूमियत झूठी लग रही थी। राजा की हंसी के पीछे कोई बड़ी चाल हो सकती है। हर किरदार अपनी भूमिका में सच्चा है।

राजा की चुप्पी

पीले वस्त्र वाले राजा ने जब हंसी उड़ाई तो लगा उन्हें सब पता है। उन्होंने प्रधानमंत्री को रोका नहीं बल्कि मजे लिया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में पात्रों के बीच की रसायन विज्ञान बहुत अच्छी है। सफेद पोशाक वाले ने अपना परिचय देकर सबको चौंका दिया। यह कहानी आगे बहुत लंबी जाने वाली है। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है।

रहस्यमयी परिचय

मछली बेचने वाले पिता की बात सबको अजीब लगी। क्या यह कोई चाल है या सच्चाई। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे रहस्य बनाए रखे गए हैं। लाल पोशाक वाले अधिकारी की घबराहट साफ दिख रही थी। महल के नियम अब टूटने वाले हैं। रानी की आंखों में आंसू नहीं बल्कि आग थी। यह दृश्य यादगार बन गया है। संवाद बहुत भारी और गहरे हैं।

सैनिकों की कशमकश

सैनिकों को दो आदेश मिल रहे थे और वे भ्रमित थे। एक तरफ प्रधानमंत्री और दूसरी तरफ रानी। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में सत्ता का यह खेल बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। कवच पहने सैनिकों की तैयारी देखकर लगा कि खून खराबा होगा। लेकिन रानी ने सब संभाल लिया। यह शक्ति संतुलन बहुत नाजुक है। हर पल नया मोड़ ले रहा है।

महल का षड्यंत्र

यह सिर्फ एक परिचय नहीं बल्कि किसी बड़े षड्यंत्र की शुरुआत है। प्रधानमंत्री क्यों डरा हुआ है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर किरदार के इरादे स्पष्ट नहीं हैं। सफेद पोशाक वाले की बातों में चालाकी थी। राजा की मुस्कान रहस्यमयी थी। ऐसे दृश्य देखकर रोमांच होता है। मंच सजावट बहुत भव्य और असली लग रही है।

संवाद की ताकत

बिना ज्यादा युद्ध के ही यह दृश्य बहुत प्रभावशाली बना। सिर्फ बातों से ही तनाव बढ़ गया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में लेखन बहुत मजबूत है। मछली वाले बेटे का जिक्र बार बार हो रहा है। यह कोई साधारण बात नहीं हो सकती। लाल पोशाक वाले ने हिम्मत दिखाई। रानी का तेज देखने लायक था। मुझे यह शैली बहुत पसंद आ रही है।

अगले भाग की उम्मीद

यह अधूरा अंत बहुत अच्छा था। अब आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ को देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। सैनिकों की वापसी और रानी का आदेश देखकर लगा कि अब असली खेल शुरू होगा। प्रधानमंत्री का अहंकार टूटने वाला है। हर दृश्य में कला दिखाई देती है। यह कड़ी बहुत रोचक है।