PreviousLater
Close

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां72एपिसोड

3.0K5.9K

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

महारानी का अदम्य साहस

महारानी का साहस देखकर दांतों तले उंगली दबानी पड़ती है। अकेले खड़ी होकर पूरे दरबार को चुनौती देना कोई साधारण बात नहीं है। चाचा का धोखा सबसे ज्यादा चुभता है जब वो तलवार निकाल लेता है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। काश उस आखिरी पल पर कोई और भी आ जाता जो सच का साथ देता।

सत्ता बनाम रिश्ते

सत्ता के खेल में रिश्ते मायने नहीं रखते, ये बात इस दृश्य में साफ दिखती है। चाचा जी कहते हैं राज्य हमारे खानदान का है, पर बेटी को नहीं सौंपेंगे। ये पुरुष प्रधान सोच कितनी पुरानी है। महारानी ने जब पति की वकालत की तो लगा वो सच में प्यार में अंधी है या फिर सबसे चतुर। हर कोई उसकी ताकत को कम आंक रहा है।

खूनी धमकियां

तीन रास्तों की धमकी देकर चाचा ने अपनी असलियत दिखा दी। या तो गद्दी छोड़ो या पति को मरवा दो। ये कितना क्रूर फैसला है। महारानी की आंखों में डर नहीं गुस्सा था। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसा मोड़ आता है तो बस देखते ही रह जाते हैं। अंत में तलवार कौन रोकता है, ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

वफा राज्य की जंग

वफा राज्य की कुर्सी के लिए ये जंग कब तक चलेगी? महारानी अकेली पड़ गई है लेकिन हारी नहीं है। उसने साफ कह दिया कि मेरे पति काबिल हैं। फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं। ये नाटक सिर्फ सत्ता का नहीं, भरोसे का भी है। चाचा का चेहरा देखकर लगता है वो पहले से ही सब प्लान कर चुका था। धोखा मिलना सबसे बुरा होता है।

भव्य दृश्य और संवाद

पोशाकें और सेट डिजाइन बहुत शानदार हैं। सिंहासन के पीछे का ड्रेगन वाला हिस्सा बहुत भव्य लग रहा है। लेकिन असली आग तो संवादों में है। जब चाचा ने कहा तुम प्यार में अंधी हो, तो महारानी का जवाब लाजवाब था। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में दृश्यों के साथ अभिनय भी शानदार है। हर झलक एक चित्र जैसा लगता है।

पति की असलियत

क्या सच में महारानी के पति मछुआरे हैं या ये सिर्फ बहाना है? चाचा बार बार इसी बात को उठा रहा है। शायद उन्हें डर है कि कहीं असली ताकतवर व्यक्ति सामने न आ जाए। महारानी ने जब कहा तुम बहुत घटिया हो, तो पूरा हॉल सन्न रह गया। ऐसे अंत बार बार नहीं देखने को मिलते। हर पल रोमांच बना रहता है।

तलवार का साया

तलवार निकलते ही माहौल बदल गया। चाचा ने सोचा था डरा धमका कर गद्दी हथिया लेगा। पर महारानी डटी रही। ये जिद्द ही उसे रानी बनाती है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे संघर्ष के दृश्य आते हैं तो दिल की धड़कन बढ़ जाती है। आखिर वो कौन था जिसने तलवार रोकी? क्या वो पति है या कोई और रक्षक?

अधिकार की लड़ाई

रिश्तों की कीमत सत्ता के आगे कुछ नहीं रही। चाचा को भतीजी की चिंता नहीं, सिर्फ कुर्सी की फिक्र है। महारानी ने शुरू में शांति से बात की पर जब हद हुई तो पलट वार किया। ये सीख मिलती है कि अपने अधिकार के लिए लड़ना जरूरी है। कहानी बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। बोरियत नहीं होती है।

संदेह के बादल

संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। क्या महारानी को अपने पति पर भरोसा करना चाहिए था? चाचा का कहना है वो धोखेबाज है। पर महारानी की आंखों में सच्चाई दिखती है। डबिंग जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी बहुत पेचीदा है। हर किरदार के अपने मकसद हैं। दर्शक के रूप में हमें हैरानी होती है कि आगे क्या होगा।

अंत में राहत

अंत में जो शख्स आया उसने सबका ध्यान खींच लिया। चाचा का चेहरा देखने लायक था। महारानी को राहत मिली होगी। ये दृश्य बताता है कि अंधेरे में भी रोशनी होती है। सत्ता के खेल में दोस्त कम और दुश्मन ज्यादा होते हैं। फिर भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। बहुत ही रोमांचक भाग था।