PreviousLater
Close

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां23एपिसोड

4.8K16.5K

(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

खाने का शौक और महारानी का अंदाज

इस दृश्य में खाने के प्रति नजरिया बदलते हुए देखना बहुत रोचक लगा। शुरू में युवती को लगता है कि यह भोजन अच्छा नहीं है लेकिन बाद में उसका स्वाद बदल जाता है। महारानी का कहना कि आम लोग खा सकते हैं तो हम क्यों नहीं, बहुत गहरा संदेश देता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसे पल बहुत महत्वपूर्ण हैं। सबके चेहरे के भाव बदलते देखना मजेदार है।

राजा और रानी का प्यारा साथ

दोनों के बीच की बॉन्डिंग इस खाने के दौरान साफ झलकती है। राजा बिना किसी झिझक के खाना खा रहे हैं और महारानी भी उनका साथ दे रही हैं। यह दृश्य दिखाता है कि शाही परिवार भी साधारण जीवन का आनंद ले सकते हैं। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे सीन देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। नेटशॉर्ट मंच पर यह देखना बहुत सुकून देने वाला अनुभव रहा। पात्रों के कपड़े और सजावट भी बहुत सुंदर हैं।

नफरत से प्यार तक का सफर

युवती का व्यवहार शुरू में बहुत अजीब लगता है जब वह खाने को गंदा कहती है। लेकिन जब उसे असली स्वाद पता चलता है तो उसका चेहरा देखने लायक होता है। यह बदलाव बहुत ही प्राकृतिक तरीके से दिखाया गया है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी की रूपरेखा में यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। संवाद बहुत ही दमदार हैं और अभिनय भी लाजवाब है। ऐसा लगता है जैसे हम भी वहीं बैठे हों।

शाही दावत का अनोखा नजारा

टेबल पर सजे पकवानों की सजावट बहुत ही आकर्षक लग रही है। कढ़ाई में उबलता हुआ शोरबा और मांस के टुकड़े भूख बढ़ा रहे हैं। इस दृश्य की शूटिंग बहुत ही बारीकी से की गई है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे दृश्य और नजारे देखने को मिलते हैं तो मजा दोगुना हो जाता है। राजा का संवाद कि खाना खाओ वरना रहने दो, बहुत कड़क है। माहौल बहुत ही गर्मजोशी भरा है।

मेहमान की एंट्री और तारीफ

अंत में जो व्यक्ति आता है वह दोनों लड़कियों की तारीफ करता है। उसका अंदाज बहुत ही विनम्र और खुशमिजाज लगता है। यह दृश्य कहानी में एक नया मोड़ लाता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में नए पात्रों का आगमन हमेशा रोचक होता है। उसकी मुस्कान और बात करने का तरीका बहुत भावुक कर देने वाला है। पूरा सीन बहुत ही हल्का फुल्का और मनोरंजक बनाया गया है।

संवादों की ताकत और अभिनय

इस सीन में संवाद बहुत ही सटीक बैठे हैं। महारानी का गुस्सा और फिर प्यार से खिलाना बहुत अच्छा लगा। युवती की जिद और फिर मान जाना भी बहुत प्यारा लगा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ के संवाद हमेशा दिल पर असर करते हैं। अभिनेताओं ने अपने किरदारों को बहुत ही खूबसूरती से निभाया है। देखने वाले को बिल्कुल भी बोरियत नहीं होती है।

पारंपरिक खाने का स्वाद

इस शो में दिखाया गया खाना बहुत ही पारंपरिक और देसी लगता है। लोग आजकल बाहर का खाना खाते हैं लेकिन यहाँ घर जैसा खाना दिखाया गया है। महारानी का यह कहना कि आम लोग खा सकते हैं बहुत सही है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में संस्कृति को भी दिखाया गया है। यह दृश्य हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। खाने के प्रति नजरिया बदलना बहुत जरूरी है।

मंच पर बेहतरीन कंटेंट

इस मंच पर ऐसे शो देखना बहुत ही अच्छा अनुभव है। चित्रण की क्वालिटी और आवाज दोनों साफ हैं। कहानी की रफ्तार भी बहुत सही है जो हमें बांधे रखती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ जैसे शो देखकर समय का पता नहीं चलता। यह दृश्य विशेष रूप से खाने के शौकीनों के लिए बहुत अच्छा है। सब कुछ बहुत ही व्यवस्थित और सुंदर तरीके से पेश किया गया है।

भावनाओं का उतार चढ़ाव

युवती के चेहरे पर घृणा और फिर खुशी देखना बहुत ही मजेदार है। यह भावनात्मक यात्रा बहुत ही कम समय में पूरी हो जाती है। महारानी का धैर्य और समझदारी भी तारीफ के लायक है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे भावनात्मक पल देखने को मिलते हैं। राजा का चुपचाप खाना खाना भी उनके स्वभाव को बताता है। यह सीन बहुत ही यादगार बन गया है।

अंत का ट्विस्ट और मुस्कान

जब वह व्यक्ति आकर तारीफ करता है तो सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह सकारात्मक माहौल बहुत ही अच्छा लगता है। खाने के बाद की खुशी अलग ही होती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ का यह प्रसंग बहुत ही खुशनुमा अंत की ओर जाता है। सभी पात्रों के बीच का तालमेल बहुत ही प्यारा है। ऐसे चित्रण देखकर दिन अच्छा हो जाता है।