इस दृश्य में छोटी बच्ची का अभिनय वाकई लाजवाब है। उसकी आँखों में छिपी शरारत और गंभीरता दोनों ही दर्शकों को बांधे रखती हैं। जब वह कार्ड निकालती है, तो लगता है जैसे कहानी का मोड़ आ गया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे पल ही तो जादू करते हैं। बैकग्राउंड में क्लिनिक का सेटिंग भी बहुत रियलिस्टिक लगा।
हरियाली भरी वर्दी पहने युवक और सुंदर युवती के बीच की केमिस्ट्री देखते ही बनती है। गलियारे में खड़े होकर बातचीत करना, फिर पैसे देना – सब कुछ इतना नेचुरल लगा। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे रोमांटिक सीन्स दर्शकों को बार-बार देखने पर मजबूर कर देते हैं। एक्टर्स के एक्सप्रेशन भी बहुत क्लीयर थे।
जब वह महिला दीवार से टिककर रोती है, तो दिल दहल जाता है। उसकी आँखों में छिपा दर्द और टूटन साफ झलक रहा था। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे इमोशनल मोमेंट्स ही तो कहानी को गहराई देते हैं। उसका सफेद कुर्ता और प्लेडेड स्कर्ट भी उसके दुख को और भी उभार रहे थे। बहुत ही दिल छू लेने वाला सीन था।
छोटी बच्ची द्वारा निकाला गया कार्ड कहानी में एक नया मोड़ ले आता है। जब वह उसे महिला को देती है, तो लगता है जैसे कोई बड़ा खुलासा होने वाला हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल्स ही तो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। कार्ड पर लिखा वर्क आईडी देखकर हैरानी हुई कि इतनी छोटी बच्ची के पास यह कैसे?
क्लिनिक का सेटिंग बहुत ही शांत और गंभीर था। नीले पर्दे, एनाटॉमी पोस्टर, ग्लोब – सब कुछ इतना रियलिस्टिक लगा। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे सेटिंग्स कहानी के मूड को बनाए रखते हैं। जब युवक दरवाजे पर खड़ा होता है, तो लगता है जैसे कोई बड़ी घटना होने वाली हो। बैकग्राउंड म्यूजिक भी बहुत सूटेबल था।