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माँ का दिल, बेटी की जिदवां65एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सैनिक की आँखों में डर

जब हरे वर्दी वाला सैनिक चौंक कर पीछे हटा, तो लगा जैसे किसी ने उसकी रूह झकझोर दी हो। बच्ची की मासूमियत और उसकी प्रतिक्रिया ने पूरे कमरे का माहौल बदल दिया। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं — गुस्सा, डर, आश्चर्य — सब कुछ इतना वास्तविक लगता है कि लगता है आप भी उसी कमरे में खड़े हैं।

हरा पोशाक वाला क्यों चिल्लाया?

उस पल जब हरे पोशाक वाले ने चिल्लाना शुरू किया, तो लगा जैसे किसी ने बम फोड़ दिया हो। बच्ची की आँखों में डर और माँ की चिंता ने दिल छू लिया। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे दृश्य ही तो कहानी को जीवंत बनाते हैं। हर किरदार की भावनाएं इतनी गहरी हैं कि आप खुद को उनके स्थान पर पाते हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे पल देखकर लगता है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई।

बच्ची की चुप्पी सबसे तेज थी

जब सब चिल्ला रहे थे, तो बच्ची की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसकी आँखों में सवाल थे, लेकिन जुबान बंद थी। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे पल ही तो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। हर किरदार की भावनाएं इतनी सच्ची हैं कि लगता है आप भी उसी कमरे में खड़े हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी अभी शुरू हुई है।

हरे पोशाक वाले का गुस्सा क्यों?

जब हरे पोशाक वाले ने गुस्से में चिल्लाना शुरू किया, तो लगा जैसे किसी ने उसकी रूह झकझोर दी हो। बच्ची की मासूमियत और उसकी प्रतिक्रिया ने पूरे कमरे का माहौल बदल दिया। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं — गुस्सा, डर, आश्चर्य — सब कुछ इतना वास्तविक लगता है कि लगता है आप भी उसी कमरे में खड़े हैं।

माँ की आँखों में आंसू

जब माँ की आँखों में आंसू आए, तो लगा जैसे किसी ने दिल पर चोट मारी हो। बच्ची की मासूमियत और उसकी प्रतिक्रिया ने पूरे कमरे का माहौल बदल दिया। माँ का दिल, बेटी की जिद में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं — गुस्सा, डर, आश्चर्य — सब कुछ इतना वास्तविक लगता है कि लगता है आप भी उसी कमरे में खड़े हैं।

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