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माँ का दिल, बेटी की जिदवां37एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खाली डिब्बे का दर्द

बच्ची का चेहरा देखकर दिल पसीज गया जब उसने खाली डिब्बा खोला। माँ का दिल, बेटी की जिद के बीच का यह संघर्ष बहुत असली लगा। घर का माहौल और पात्रों के कपड़े उस दौर को बहुत अच्छे से दिखाते हैं। नेटशॉर्ट अनुप्रयोग पर ऐसे भावनात्मक दृश्य देखना एक अलग ही अनुभव है जो दर्शक को बांधे रखता है।

वर्दी वाला पापा

हरी वर्दी में वह आदमी बहुत मजबूत लग रहा है, लेकिन बच्ची के सामने उसका कोमल पक्ष देखकर अच्छा लगा। अस्पताल वाले दृश्य में उसने जो लिफाफा दिया, उससे कहानी में एक नया मोड़ आया है। माँ का दिल, बेटी की जिद जैसे नाटक में ऐसे किरदार ही जान डालते हैं। अभिनय बहुत स्वाभाविक है।

कपड़ों की दुकान का दृश्य

कपड़ों की दुकान वाला दृश्य बहुत रंगीन और जीवंत था। दुकानदार की प्रतिक्रिया जब उसने पैसे देखे, वह कमाल की थी। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी-छोटी खुशियाँ बड़े पलों में बदल जाती हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य रूप से समृद्ध दृश्य देखना बहुत सुकून देता है।

बेटी की मासूमियत

छोटी बच्ची का अभिनय लाजवाब है। चाहे वह खाली डिब्बा देख रही हो या कपड़ों की दुकान में खड़ी हो, उसकी आँखों में सब कुछ साफ दिखता है। माँ का दिल, बेटी की जिद जैसे कार्यक्रम में बच्चों के किरदार अक्सर दिल जीत लेते हैं। उसकी मासूमियत और जिद्द दोनों ही बहुत प्यारी लगती हैं।

अस्पताल का तनाव

अस्पताल के बिस्तर पर लेटी महिला और वह आदमी, इनके बीच का लगाव बहुत गहरा है। लिफाफे वाला दृश्य रहस्य से भरा हुआ था। माँ का दिल, बेटी की जिद की पटकथा में यह मोड़ बहुत अहम लग रहा है। नेटशॉर्ट अनुप्रयोग पर ऐसे रहस्यमय दृश्य देखकर अगली कड़ी का इंतजार होता है।

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