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माँ का दिल, बेटी की जिदवां12एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सम्मान समारोह की चमक

जब वह मंच पर गई तो सबकी सांसें थम गईं। उसकी मुस्कान में एक अलग ही जादू था। माँ का दिल, बेटी की जिद जैसे शब्द यहाँ फिट बैठते हैं। सैनिकों की तालियाँ और उसका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सुकून देता है।

ऑफिस का तनाव और उम्मीद

कमांडर के ऑफिस में जो बातचीत हुई, उसमें गहराई थी। चेहरे के भाव बता रहे थे कि कुछ बड़ा होने वाला है। माँ का दिल, बेटी की जिद की तरह यहाँ भी एक संघर्ष दिख रहा था। किताबें, फाइलें और सैन्य वर्दी – सब कुछ एक कहानी कह रहा था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामा देखना मजेदार लगता है।

बच्ची की मासूमियत

छोटी बच्ची जब उस सैनिक के साथ चलती है, तो लगता है जैसे वह उसकी दुनिया है। उसकी आँखों में सवाल हैं, लेकिन वह चुपचाप सब देख रही है। माँ का दिल, बेटी की जिद यहाँ भी झलकता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखकर दिल पिघल जाता है।

वर्दी का गर्व

हर सैनिक की वर्दी में एक अलग गरिमा है। जब वे एक साथ बैठते हैं, तो लगता है जैसे एक परिवार हो। माँ का दिल, बेटी की जिद की तरह यहाँ भी एकजुटता दिखती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स देखना गर्व की बात है।

मंच पर उसकी जीत

जब उसे सम्मान मिला, तो उसकी आँखों में आँसू थे। यह सिर्फ एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उसके संघर्ष की जीत थी। माँ का दिल, बेटी की जिद यहाँ भी काम आया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे मोमेंट्स देखकर लगता है कि जीवन में कुछ पाना मुमकिन है।

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