माँ का दिल, बेटी की जिद में दिखाया गया है कि कैसे एक माँ दो बेटियों के बीच फँस जाती है। सफेद पोशाक वाली बेटी की मासूमियत और भूरे रंग की पोशाक वाली बेटी की उदासी दिल को छू लेती है। माँ का चेहरा दर्द से भरा है, जैसे वह दोनों को गले लगाना चाहती हो लेकिन मजबूरी में एक को छोड़ रही हो। यह दृश्य इतना भावुक है कि आँखें नम हो जाती हैं।
जब भूरी पोशाक वाली बेटी दरवाजा बंद करती है और सफेद पोशाक वाली बेटी बाहर खड़ी रह जाती है, तो लगता है जैसे जीवन ने उसे अकेला छोड़ दिया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे ज्यादा दर्दनाक है। बच्ची की आँखों में आँसू और माँ की मजबूरी देखकर लगता है कि कभी-कभी प्यार भी बेबसी बन जाता है।
गाँव की औरतें जब इस माँ-बेटी के ड्रामे को देख रही हैं, तो उनकी नज़रों में न तो सहानुभूति है न ही गुस्सा, बस एक अजीब सी उत्सुकता है। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दिखाता है कि समाज कैसे हर चीज़ को तमाशे की तरह देखता है। माँ की बेबसी और बच्चों का दर्द उनके लिए बस एक चर्चा का विषय है।
सफेद पोशाक पहनी बेटी मासूमियत और पवित्रता का प्रतीक लगती है, जबकि भूरी पोशाक वाली बेटी जीवन की कठिनाइयों को दर्शाती है। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह रंगों का खेल बहुत गहरा है। माँ जब सफेद पोशाक वाली बेटी का हाथ पकड़ती है, तो लगता है वह उसकी मासूमियत को बचाना चाहती है, लेकिन दूसरी बेटी का दर्द अनदेखा नहीं किया जा सकता।
माँ की आँखों में वह बेबसी जो दिखाई देती है जब वह एक बेटी को छोड़कर दूसरी के साथ जाती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला है। उसका चेहरा बता रहा है कि वह दोनों को साथ ले जाना चाहती है, लेकिन परिस्थितियाँ उसे मजबूर कर रही हैं।