लाल पर्दे के सामने खड़ा वह सैनिक वर्दी वाला शख्स बेहद गंभीर लग रहा है। उसके चेहरे पर झलकती चिंता और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। सामने खड़ी छोटी बच्ची लाल रंग की किताब पकड़े हुए है, जो शायद किसी महत्वपूर्ण सबूत या यादगार का प्रतीक है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस दृश्य में हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं। कोई हैरान है, तो कोई दुखी। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखता है।
वह छोटी सी बच्ची जिसने पीली ड्रेस पहनी है, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक और जिद दिखाई दे रही है। वह अपनी मां के पास खड़ी होकर सब कुछ शांति से देख रही है। जब वह बड़ी महिला से बात करती है, तो उसकी आवाज में एक अलग ही मासूमियत है। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह पात्र बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। उसकी हर हरकत से लगता है कि वह कुछ छुपा रही है या फिर किसी बड़ी सच्चाई को जानती है।
गुलाबी पोशाक पहनी उस महिला के चेहरे पर जो दर्द और आंसू हैं, वे दिल को छू लेते हैं। वह बार-बार अपने आंसू पोंछ रही है और उसकी आंखों में एक गहरा दुख साफ झलक रहा है। शायद उसका रिश्ता उस सैनिक वर्दी वाले शख्स से बहुत गहरा है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस मोड़ पर लगता है कि कोई बड़ा खुलासा होने वाला है। उसकी चुप्पी और आंसू कहानी के सबसे भावुक पल को दर्शाते हैं।
हरा यूनिफॉर्म और लाल बेल्ट पहने वह शख्स कमरे में एक अलग ही अधिकार जता रहा है। उसके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वह किसी बड़ी जिम्मेदारी या फैसले के बीच फंसा हुआ है। वह बार-बार दूसरे पात्रों की तरफ देख रहा है, जैसे वह किसी जवाब की तलाश में हो। माँ का दिल, बेटी की जिद की इस कहानी में उसका किरदार बहुत मजबूत और प्रभावशाली लग रहा है। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
जब वह शख्स और महिला उस खाली कमरे में पहुंचते हैं, तो माहौल एकदम बदल जाता है। हरे और सफेद रंग की दीवारें और खाली बिस्तर एक अजीब सी उदासी पैदा करते हैं। शायद यह जगह उनके लिए किसी पुरानी याद को ताजा करती है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस दृश्य में लगता है कि कोई बड़ा राज खुलने वाला है। उस कमरे की खामोशी और पात्रों के चेहरे के भाव कहानी को एक नया मोड़ दे रहे हैं।