शुरुआत में लड़की के हाथ में गुलाबों का गुलदस्ता देखकर लगा कि कोई रोमांटिक सरप्राइज होने वाला है, लेकिन जैसे ही सैनिक वर्दी वाले पात्र ने दस्तावेज निकाला, माहौल एकदम गंभीर हो गया। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस सीन में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक सी जाती है। कमरे की सजावट और पात्रों के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि यह कोई साधारण मुलाकात नहीं, बल्कि रिश्तों का अंत या नई शुरुआत का पल है।
जब दो सैनिक एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े होते हैं और बीच में वह लड़की होती है जिसकी आंखों में डर साफ दिख रहा है, तो लगता है कि देश की रक्षा करने वाले भी अपने निजी जीवन के युद्ध से अछूते नहीं हैं। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह दृश्य सबसे ज्यादा दिल को छू लेता है। वर्दी का रंग हरा है लेकिन हालात लाल हो रहे हैं, यह विरोधाभास दर्शकों को बांधे रखता है।
एक साधारण सा कागज का टुकड़ा, जिस पर कुछ शब्द लिखे हैं, ने पूरे कमरे का माहौल बदल कर रख दिया। जब वह सैनिक उस फाइल को पढ़ता है, तो उसके चेहरे के भाव देखकर लगता है कि उसकी दुनिया हिल गई है। माँ का दिल, बेटी की जिद में दिखाया गया यह मोड़ बहुत ही दर्दनाक है। बिना किसी शोर-शराबे के, बस खामोशी और कागजों की सरसराहट ने पूरा दर्द बयां कर दिया।
दूसरे सीन में जब लड़का और लड़की सोफे पर बैठे हैं, तो उनके बीच की दूरी सिर्फ जगह की नहीं, बल्कि दिलों की भी लगती है। लड़के का हाथ पकड़ना और लड़की का नजरें चुराना बता रहा है कि कुछ टूट चुका है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस हिस्से में जो खामोशी है, वह हजारों शोर से ज्यादा भारी लगती है। पुराने जमाने का सेट और कपड़े इस दर्द को और भी गहरा बना देते हैं।
जब वह लड़की मोमबत्ती की रोशनी में कुछ सिल रही होती है, तो लगता है कि वह अपने टूटे हुए रिश्ते को जोड़ने की कोशिश कर रही है। उसकी उंगलियों में सुई और आंखों में आंसू, यह नजारा बहुत ही दर्दनाक है। माँ का दिल, बेटी की जिद में दिखाया गया यह दृश्य बताता है कि औरतें कैसे चुपचाप अपने दर्द को सहन कर लेती हैं। पीछे बैठा लड़का बेबस होकर सब देख रहा है, जो स्थिति को और भी जटिल बना देता है।