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माँ का दिल, बेटी की जिदवां22एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

आँसू और वर्दी का टकराव

जब सैनिक वर्दी पहने युवक ने उस रोती हुई महिला को गोद में उठाया, तो मेरा दिल पसीज गया। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे भावुक था। बच्ची का चेहरा देखकर लगता है जैसे वह सब समझ गई हो। आँखों में आँसू और चेहरे पर मजबूरी - यह अभिनय कमाल की है।

बच्ची की मासूमियत ने जीता

पूरे प्रसंग में सबसे ज्यादा असर उस छोटी बच्ची के चेहरे का हुआ। जब वह अपनी माँ को जाते हुए देख रही थी, तो उसकी आँखों में सवाल थे। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक था। बच्ची का अभिनय इतना प्राकृतिक लगा कि मैं भी रो पड़ा।

वर्दी वाला प्यार

हरा वर्दी पहने युवक का वह अंदाज जब उसने महिला को संभाला, तो लगा जैसे कोई नायक हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे हृदयस्पर्शी था। उसकी आँखों में चिंता और हाथों में मजबूती - बिल्कुल बेहतरीन मेल। ऐसे किरदार ही दिल जीतते हैं।

माँ का दर्द सब देख रहे हैं

जब वह महिला रो रही थी और सब चुपचाप देख रहे थे, तो लगा जैसे समय थम गया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे ज्यादा भावुक था। उसकी आँखों से टपकते आँसू और चेहरे पर दर्द - बिल्कुल असली लग रहा था। ऐसे पल ही कहानी को यादगार बनाते हैं।

बेटी की जिद माँ को ले गई

जब बच्ची ने अपनी माँ को जाने से रोका, तो लगा जैसे दिल टूट गया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक था। बच्ची की आँखों में आँसू और माँ के चेहरे पर मजबूरी - यह मेल कमाल का था। ऐसे प्रसंग ही दिल को छू जाते हैं।

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