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माँ का दिल, बेटी की जिदवां68एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

माँ का दिल, बेटी की जिद में दर्द की गहराई

इस शॉर्ट ड्रामा में माँ और बेटी के बीच का रिश्ता बहुत ही भावुक है। माँ की आँखों में छिपा दर्द और बेटी की जिद दोनों ही दिल को छू लेते हैं। खासकर वो पल जब माँ बेटी को गले लगाती है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद ने मुझे रुला दिया।

बेटी की मासूमियत ने जीत लिया दिल

बेटी का चेहरा, उसकी मासूमियत और उसकी आँखों में छिपी उम्मीदें सब कुछ बहुत ही सुंदर है। जब वह माँ से बात करती है, तो लगता है जैसे वह दुनिया की सबसे बड़ी समस्या हल कर रही हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य सबसे ज्यादा प्रभावशाली था।

माँ की चुप्पी में छिपा है सब कुछ

माँ की चुप्पी में छिपा दर्द और उसकी आँखों में छिपी कहानी बहुत ही गहरी है। वह कुछ नहीं कहती, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ कह देती हैं। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य बहुत ही भावुक था और मुझे बहुत प्रभावित किया।

बेटी की जिद ने बदल दी कहानी

बेटी की जिद ने माँ के दिल को छू लिया और कहानी को एक नया मोड़ दे दिया। जब बेटी माँ से बात करती है, तो लगता है जैसे वह माँ के दिल की बात समझ गई हो। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य बहुत ही प्रभावशाली था।

माँ और बेटी का रिश्ता अनोखा

माँ और बेटी का रिश्ता बहुत ही अनोखा है। माँ की आँखों में छिपा दर्द और बेटी की आँखों में छिपी उम्मीदें दोनों ही दिल को छू लेते हैं। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दृश्य बहुत ही भावुक था और मुझे बहुत प्रभावित किया।

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