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माँ का दिल, बेटी की जिदवां34एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की मासूमियत ने जीता दिल

इस दृश्य में छोटी बच्ची की मासूमियत और उसकी बातचीत का तरीका बहुत प्यारा लगा। वह अपनी माँ से जो सवाल पूछती है, उसमें एक अलग ही जिज्ञासा है। माँ का धैर्य और प्यार भी बहुत अच्छे से दिखाया गया है। यह दृश्य माँ का दिल, बेटी की जिद का एक सुंदर उदाहरण है।

सैनिक की भावनाएं और परिवार का प्यार

सैनिक का चेहरा देखकर लगता है कि वह अपने परिवार से दूर होने के कारण उदास है। लेकिन जब वह अपनी पत्नी और बेटी से मिलता है, तो उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। यह दृश्य माँ का दिल, बेटी की जिद के साथ-साथ परिवार के प्यार को भी दर्शाता है।

माँ और बेटी का रिश्ता

माँ और बेटी के बीच का रिश्ता बहुत ही खूबसूरत दिखाया गया है। बेटी की जिद और माँ का धैर्य दोनों ही बहुत अच्छे से दिखाए गए हैं। यह दृश्य माँ का दिल, बेटी की जिद का एक सुंदर उदाहरण है।

अस्पताल का दृश्य और भावनाएं

अस्पताल का दृश्य बहुत ही भावुक है। सैनिक और उसकी पत्नी के बीच की बातचीत और बेटी की चिंता सब कुछ बहुत अच्छे से दिखाया गया है। यह दृश्य माँ का दिल, बेटी की जिद के साथ-साथ परिवार के प्यार को भी दर्शाता है।

बच्ची की जिद और माँ का धैर्य

बच्ची की जिद और माँ का धैर्य दोनों ही बहुत अच्छे से दिखाए गए हैं। बच्ची की बातचीत का तरीका और माँ का जवाब देना सब कुछ बहुत ही प्राकृतिक लगता है। यह दृश्य माँ का दिल, बेटी की जिद का एक सुंदर उदाहरण है।

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