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माँ का दिल, बेटी की जिदवां47एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सैनिक का दिल और माँ का फैसला

जब सैनिक ने वह कागज दिया, तो लगा जैसे किसी ने दिल पर पत्थर रख दिया हो। माँ की आँखों में वो दर्द साफ दिख रहा था, जैसे वह अपने बच्चे को खो रही हो। बेटी की जिद और माँ का समर्पण दोनों ही दिल को छू लेते हैं। यह दृश्य इतना भावुक था कि आँसू रोकना मुश्किल हो गया।

बेटी की मासूमियत ने जीता दिल

छोटी बेटी का वह सवाल और माँ का जवाब देखकर लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा सच सामने आ गया हो। माँ का दिल, बेटी की जिद के आगे झुक गया, लेकिन उसमें भी एक अजीब सी खुशी थी। यह दृश्य इतना प्यारा था कि बार-बार देखने का मन करता है।

सैनिक की चुप्पी में छिपा दर्द

सैनिक की चुप्पी और माँ की आँखों में छिपा दर्द देखकर लगता है जैसे दोनों के बीच एक अनकही कहानी चल रही हो। माँ का दिल, बेटी की जिद के आगे टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। यह दृश्य इतना गहरा था कि दिल पर असर छोड़ गया।

माँ का त्याग और बेटी की खुशी

माँ ने अपने दिल की बात को दबाकर बेटी की खुशी के लिए फैसला लिया। यह दृश्य इतना भावुक था कि आँसू रोकना मुश्किल हो गया। माँ का दिल, बेटी की जिद के आगे झुक गया, लेकिन उसमें भी एक अजीब सी खुशी थी।

सैनिक और माँ के बीच की दूरी

सैनिक और माँ के बीच की दूरी देखकर लगता है जैसे दोनों के बीच एक अनकही कहानी चल रही हो। माँ का दिल, बेटी की जिद के आगे टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। यह दृश्य इतना गहरा था कि दिल पर असर छोड़ गया।

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