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माँ का दिल, बेटी की जिदवां30एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सैनिक की परेशानी और मासूम बच्ची

इस दृश्य में सैनिक वर्दी पहने व्यक्ति की चिंता साफ झलकती है, जबकि छोटी बच्ची की मासूमियत दिल को छू लेती है। माँ का दिल, बेटी की जिद कहानी में भावनात्मक गहराई लाती है। कमरे का पुराना माहौल और दीवार पर लगी तस्वीरें उस दौर की याद दिलाती हैं। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है सब कुछ असली हो रहा है।

कमरे में छिपा राज और बच्ची की खोज

जब बच्ची दराज में पैसे ढूंढती है, तो लगता है कहानी में कोई बड़ा मोड़ आने वाला है। माँ का दिल, बेटी की जिद के तहत यह दृश्य बहुत ही रोचक है। महिला का चेहरा देखकर लगता है वह कुछ छिपा रही है। पुराने रेडियो और फर्नीचर ने उस समय की झलक बहुत अच्छे से पेश की है।

सैनिकों के बीच तनावपूर्ण संवाद

गलियारे में सैनिकों के बीच हुई बातचीत में तनाव साफ दिखाई देता है। माँ का दिल, बेटी की जिद कहानी के इस हिस्से में ड्रामा बढ़ जाता है। एक सैनिक का चेहरा देखकर लगता है वह कुछ गंभीर बात सोच रहा है। वर्दी और टोपी का डिज़ाइन उस युग का सही प्रतिबिंब है।

महिला और बच्ची का भावनात्मक रिश्ता

महिला और बच्ची के बीच का रिश्ता बहुत ही कोमल और भावनात्मक है। माँ का दिल, बेटी की जिद के तहत यह दृश्य दिल को छू लेता है। जब महिला बच्ची को पैसे देती है, तो लगता है वह उसे कुछ सिखाना चाहती है। उनके कपड़े और हेयरस्टाइल उस समय की सही झलक हैं।

पुराने घर की खूबसूरती और कहानी

इस दृश्य में दिखाया गया घर बहुत ही सुंदर और पुराने जमाने का है। माँ का दिल, बेटी की जिद कहानी के इस हिस्से में घर का माहौल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। दीवार पर लगी तस्वीरें और फर्नीचर उस दौर की याद दिलाते हैं। हर चीज़ में एक अलग ही कहानी छिपी हुई है।

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