जब उस छोटी सी बच्ची ने हाथ में पकड़ा हुआ खिलौना छोड़कर वह फाइल उठाई, तो पूरा कमरा सन्न रह गया। उसकी आँखों में डर और हैरानी साफ दिख रही थी। माँ का दिल, बेटी की जिद वाले पल में हर किसी की सांसें थम सी गईं। सैनिक वर्दी वाले पिता का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह अंदर से टूट चुके हैं। यह दृश्य इतना भावुक था कि आँखें नम हो गईं।
कमरे में खड़ी हर शख्सियत के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे। हरे रंग की साड़ी वाली महिला की चिंता और ग्रे वेस्ट वाली महिला का आत्मविश्वास एक दूसरे के विपरीत थे। बीच में खड़ा सैनिक अपनी ही दुनिया में खोया हुआ लग रहा था। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस संघर्ष में हर कोई अपने आप को अकेला महसूस कर रहा था। बिना एक शब्द बोले ही सब कुछ कह दिया गया।
हरा यूनिफॉर्म और लाल बेल्ट पहने वह व्यक्ति कमरे के बीचों-बीच खड़ा था, लेकिन उसकी आँखें बार-बार उस छोटी बच्ची पर टिकी थीं। जब दूसरे सैनिक ने वह कागजात लाकर दिए, तो उसके चेहरे के भाव बदल गए। माँ का दिल, बेटी की जिद की इस कहानी में वह पिता सबसे ज्यादा असहाय लग रहा था। उसकी चुप्पी चीख रही थी कि वह अपने परिवार को बचाना चाहता है।
एक तरफ हरे रंग की ड्रेस में सजी महिला थीं जो घबराई हुई लग रही थीं, तो दूसरी तरफ ग्रे वेस्ट वाली महिला बांहें बांधे खड़ी थीं। दोनों के बीच की नजरों की लड़ाई देखने लायक थी। माँ का दिल, बेटी की जिद के बीच यह स्पष्ट था कि दोनों के बीच कुछ अनकहा चल रहा है। उस बच्ची के हाथ में वह फाइल आते ही माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया।
सबसे चौंकाने वाला पल तब आया जब वह दस्तावेज उस मासूम बच्ची को दिया गया। उसने अपने हाथ से खिलौना छोड़कर वह फाइल पकड़ ली। उसकी उम्र में उसे यह सब समझना नहीं चाहिए था। माँ का दिल, बेटी की जिद की इस कहानी में बच्ची को बीच में लाना सबसे गलत फैसला लगा। उसकी मासूम आँखों में सवालों का अंबार था जो किसी से पूछ नहीं पा रही थी।