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माँ का दिल, बेटी की जिदवां17एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पांच साल का फर्क

वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे पांच साल पहले का प्यार आज की कड़वाहट में बदल गया है। जब वह सैनिक वर्दी में था, तब सब कुछ सुंदर लगता था, लेकिन अब वही चेहरा गुस्से से भरा है। माँ का दिल, बेटी की जिद नामक इस ड्रामे में भावनाओं का उतार-चढ़ाव बहुत गहरा है। खाने की मेज पर हुआ वह झगड़ा दिल को छू लेता है, खासकर जब बच्ची डर जाती है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हर उस रिश्ते की सच्चाई है जो समय के साथ टूट जाता है।

मेज पर गिरा हुआ प्यार

जब उसने गुस्से में मेज पलट दी, तो सिर्फ खाना नहीं गिरा, बल्कि उस घर का सुकून भी टूट गया। बच्ची की आंखों में डर और मां के चेहरे पर वह निराशा देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। माँ का दिल, बेटी की जिद कहानी में यही सबसे दर्दनाक पल है जहां एक पिता अपनी ही बेटी के सामने इतना हिंसक हो जाता है। वह सैनिक वर्दी पहनकर हीरो बनना चाहता था, लेकिन असलियत में वह अपने ही परिवार का दुश्मन बन गया। बहुत ही भावुक दृश्य है।

बच्ची की मासूमियत

इस पूरे झगड़े में सबसे ज्यादा दर्द उस छोटी बच्ची को हुआ होगा जो चुपचाप सब देख रही थी। उसकी आंखों में सवाल थे कि पापा अचानक इतने बदल क्यों गए? माँ का दिल, बेटी की जिद शो में बच्चों पर पड़ने वाले असर को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। जब मां उसे लेकर चली गई, तो वह राहत भी थी और दर्द भी। एक मां अपने बच्चे को बचाने के लिए कितना कुछ सहन कर सकती है, यह दृश्य उसी का सबूत है।

वर्दी का अभिमान

हरा यूनिफॉर्म और लाल कॉलर उसे बहुत सूट कर रहा था, लेकिन लगता है उस वर्दी ने उसके अंदर के इंसान को मार दिया है। शुरुआत में वह कितना मुस्कुराता था, और अब वह कितना क्रूर हो गया है। माँ का दिल, बेटी की जिद में यह दिखाया गया है कि कैसे पावर और अहंकार रिश्तों को कैसे खा जाते हैं। जब वह मेज पलटता है, तो लगता है कि वह अपनी असफलता का गुस्सा अपनी पत्नी पर निकाल रहा है। सैनिक होना गर्व की बात है, लेकिन घर में तानाशाह बनना नहीं।

खामोश चीखें

उस औरत ने पूरे झगड़े के दौरान बहुत कम बात की, लेकिन उसकी खामोशी में जो चीख थी, वह हजार शब्दों से ज्यादा भारी थी। जब उसने मेज साफ की और बच्ची का हाथ पकड़ा, तो वह उसकी जीत थी। माँ का दिल, बेटी की जिद कहानी में महिला के धैर्य और ताकत को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। वह रोई नहीं, चिल्लाई नहीं, बस चुपचाप अपने बच्चे को लेकर चली गई। यह सबसे बड़ा जवाब था उस सैनिक के घमंड को।

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