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माँ का दिल, बेटी की जिदवां25एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दर्पण में छिपा राज़

शुरुआत में ही नायिका का अपने चेहरे को दर्पण में देखकर चौंकना दिलचस्प था। लगता है जैसे कोई बड़ा बदलाव आने वाला हो। अस्पताल का माहौल और सैनिक वर्दी पहने पुरुषों का आगमन कहानी में एक नया मोड़ लाता है। माँ का दिल, बेटी की जिद जैसे भावनात्मक पहलू यहाँ साफ़ झलकते हैं जब वह बिस्तर पर लेटी होती है। डॉक्टर की जाँच और फिर दवाइयों का आदान-प्रदान दिखाता है कि स्वास्थ्य की चिंता सबको है। बच्ची का मासूम चेहरा और उसकी बातचीत ने सीन को हल्का कर दिया।

वर्दी वाला मेहमान

जब वह सैनिक कमरे में आया तो पूरा माहौल बदल गया। उसकी वर्दी और बात करने का तरीका बहुत प्रभावशाली था। नायिका के चेहरे पर जो डर था, वह धीरे-धीरे राहत में बदलता दिखा। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह पल बहुत अहम है जहाँ परिवार और देखभाल का अहसास होता है। दूसरे सैनिक का दवाइयाँ लाना और उन्हें टेबल पर रखना एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण विवरण था। बच्ची का उस आदमी से बात करना और फिर मुस्कुराना बहुत प्यारा लगा।

अस्पताल की वो शाम

पीली दीवारें और हरे रंग का निचला हिस्सा उस दौर के अस्पताल को बखूबी दर्शाता है। नायिका की स्ट्राइप्ड पजामा और चोटी उसकी सादगी को बढ़ाती है। जब डॉक्टर स्टेथोस्कोप से जाँच करता है, तो लगता है सब ठीक हो जाएगा। माँ का दिल, बेटी की जिद के संदर्भ में यह दृश्य बहुत भावुक है। सैनिकों का सम्मानजनक व्यवहार और बच्ची की मासूमियत ने सीन को जीवंत बना दिया। दवाइयों का बॉक्स और उस पर लिखा नाम भी ध्यान खींचता है।

बेटी की मासूम चिंता

छोटी बच्ची का अपनी माँ के पास खड़े होकर बात करना और फिर उस सैनिक से संवाद करना बहुत प्यारा था। उसकी आँखों में चिंता और फिर खुशी साफ़ दिख रही थी। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह रिश्ता सबसे मजबूत कड़ी है। जब वह उंगली उठाकर कुछ कहती है, तो लगता है जैसे वह सबको समझा रही हो। सैनिकों का उसके प्रति व्यवहार भी बहुत कोमल था। यह सीन दिखाता है कि बच्चे भी स्थिति को समझते हैं और अपनी तरह से प्रतिक्रिया देते हैं।

दवाइयों का उपहार

जब दूसरा सैनिक दवाइयों का बॉक्स लेकर आता है और पहले सैनिक को देता है, तो एक अलग ही ऊर्जा आती है। यह सिर्फ दवा नहीं, बल्कि देखभाल का प्रतीक है। माँ का दिल, बेटी की जिद के संदर्भ में यह पल बहुत महत्वपूर्ण है। नायिका का चेहरा देखकर लगता है कि उसे राहत मिली है। सैनिकों के बीच का तालमेल और उनका नायिका के प्रति व्यवहार बहुत अच्छा लगा। बच्ची का भी इसमें शामिल होना कहानी को और गहरा करता है।

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