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माँ का दिल, बेटी की जिदवां63एपिसोड

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माँ का दिल, बेटी की जिद

मोली एक समझदार बच्ची है। वह अपनी माँ काव्या को चेहरे के दागों की वजह से पिता मोहन की तकलीफें देखती है। मोहन ने ज्योति और टीना को साथ रखा है। काव्या की मौत के बाद मोली शादी में घुसकर मर जाती है। फिर मोली एक साल पीछे जाकर जी उठती है। इस बार वह माँ की जान बचाती है, चेहरे का इलाज कराती है, और उन्हें बदमाश पति से छुड़वा देती है। फिर काव्या अपनी एम्ब्रॉयडरी कला से देश की पहली महिला उद्योगपति बन जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सुबह की चाय में छिपा था ज़हर

शुरुआत में लगा कि यह एक प्यारा सा पारिवारिक दृश्य है, लेकिन जैसे ही वह आदमी चाय पीता है और बेहोश हो जाता है, सब कुछ बदल जाता है। माँ का दिल, बेटी की जिद के बीच यह धोखा बहुत गहरा है। महिला की मुस्कान के पीछे छिपी चालाकी देखकर रोंगटे खड़े हो गए। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सस्पेंस से भरे पल देखना बहुत रोमांचक है।

बेटी की मासूमियत या बड़ी साजिश?

छोटी बच्ची का वह कप आदमी को देना और फिर उसका गायब हो जाना, यह सब बहुत सोची-समझी लगती है। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह मोड़ बहुत हैरान करने वाला है। जब वह आदमी बिस्तर पर उठता है और उसे कुछ समझ नहीं आता, तो दर्शक के रूप में हम भी उसी कन्फ्यूजन में फंस जाते हैं। बहुत ही दमदार एक्टिंग है।

बिस्तर वाला सीन और अचानक एंट्री

जब वह आदमी होश में आता है और महिला के साथ बिस्तर पर पाता है, तो उसका चेहरा देखने लायक है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस प्लॉट में ट्विस्ट पर ट्विस्ट आ रहे हैं। और तभी दरवाजे से दूसरे सिपाही की एंट्री, जिसने सब कुछ देख लिया। यह क्लिफहैंगर बहुत जबरदस्त है, अब आगे क्या होगा यह जानने की बेचैनी बढ़ गई है।

वर्दी वाले की बेवकूफी देखकर गुस्सा आता है

इतनी आसानी से वह आदमी धोखा खा गया, यह देखकर हैरानी होती है। माँ का दिल, बेटी की जिद में दिखाया गया यह धोखा बहुत चौंकाने वाला है। महिला ने बड़ी चालाकी से उसे फंसाया और जब वह उठा तो सब कुछ गड़बड़ था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इंटेंस सीन्स देखना बहुत अच्छा लगता है, जो सीधे दिल पर असर करते हैं।

महिला के आंसू असली हैं या नकली?

जब वह आदमी उसे सवाल पूछता है, तो महिला का रोना और डरना बहुत असली लगता है। माँ का दिल, बेटी की जिद की इस कहानी में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। क्या वह सच में डरी हुई है या यह सब एक नाटक है? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि कन्फ्यूजन होना लाजिमी है।

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