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जब वह आदमी उसे सवाल पूछता है, तो महिला का रोना और डरना बहुत असली लगता है। माँ का दिल, बेटी की जिद की इस कहानी में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। क्या वह सच में डरी हुई है या यह सब एक नाटक है? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि कन्फ्यूजन होना लाजिमी है।