जब वह हरी वर्दी पहने शख्स उस औरत को कार में जाते देखता है, तो उसके चेहरे का भाव देखकर दिल दहल जाता है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस मोड़ पर लगता है कि कोई पुराना वादा टूट गया है। उसकी मुट्ठी का बंधना और फिर दूसरी लड़की का हाथ थामना, सब कुछ इतना तेजी से बदलता है कि सांस रुक सी जाती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना हमेशा खास लगता है।
स्क्रीन पर 'एक महीने बाद' लिखा आता है और सीन पूरी तरह बदल जाता है। ऑफिस का माहौल, नई पोशाकें और चेहरों पर नई चमक। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी में यह टाइम जंप बहुत जरूरी था। अब लगता है कि सब कुछ सुलझने वाला है, लेकिन उस सैनिक अफसर की नजरें अभी भी उस औरत को ढूंढ रही हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर कहानी का यह मोड़ बहुत अच्छा लगा।
जब हरे रंग की ड्रेस पहनी वह लड़की आती है और सैनिक का हाथ थामती है, तो लगता है कि उसने अपनी जगह बना ली है। माँ का दिल, बेटी की जिद के इस हिस्से में तीन पात्रों के बीच का तनाव साफ दिखता है। उस लड़की की मुस्कान में एक अजीब सी जीत है, जबकि सैनिक की आँखों में अभी भी उलझन बाकी है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे कॉम्प्लेक्स रिश्ते देखना दिलचस्प है।
इस पूरे ड्रामे में सबसे ज्यादा असर उस छोटी बच्ची की आँखों से होता है। वह सब कुछ देख रही है लेकिन समझ नहीं पा रही। माँ का दिल, बेटी की जिद में बच्चों पर पड़ने वाले असर को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। जब वह अपनी माँ के साथ कार में जाती है, तो उसका चेहरा सवाल पूछ रहा होता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स देखकर इंसान सोचने पर मजबूर हो जाता है।
ऑफिस वाले सीन में जब वह औरत अपनी बेटी के साथ अंदर आती है, तो माहौल में एक अलग ही ऊर्जा होती है। माँ का दिल, बेटी की जिद की कहानी अब नए मोड़ पर है। सैनिक अफसर का मुस्कुराना और उस औरत का आत्मविश्वास से भरा अंदाज बताता है कि शायद सब कुछ ठीक होने वाला है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह पॉजिटिव टर्न बहुत सुकून देने वाला लगा।