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योद्धा का बदलावां46एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

मुखौटा उतारते ही हंसी का धमाका

जब वो काला मुखौटा उतरा और चेहरे पर शैतानी हंसी फैली, तो सच में रोंगटे खड़े हो गए। योद्धा का बदला में ऐसे विलेन ही तो चाहिए जो डराएं भी और हंसाएं भी। नीली पोशाक वाले युवक का गुस्सा देखकर लग रहा है कि अब असली लड़ाई शुरू होने वाली है। माहौल में तनाव इतना है कि सांस रुक सी गई है।

लाल कालीन पर खूनी खेल

लाल कालीन पर खड़ा वो गंजा योद्धा अपनी तलवार के साथ कितना खतरनाक लग रहा है। उसके पीछे खड़े नकाबपोश सैनिकों का सन्नाटा डरावना है। योद्धा का बदला की कहानी में यह दृश्य सबसे ज्यादा रोमांचक है। सामने खड़े तीनों योद्धाओं की आंखों में डर नहीं, बल्कि बदले की आग साफ दिख रही है।

नीली पोशाक वाले की आंखों में आग

नीली पोशाक पहने उस युवक की आंखों में जो क्रोध है, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जब वो चिल्लाया, तो लगा जैसे पूरा मैदान गूंज उठा हो। योद्धा का बदला में ऐसे ही जज्बाती दृश्यों की कमी थी। सामने वाले की हंसी उसे और भी ज्यादा भड़का रही है, अब देखना है कि पहली वार कौन करता है।

विलेन की शैतानी हंसी

गंजे विलेन की वो शैतानी हंसी और तलवार की मूठ पकड़ने का अंदाज कमाल का है। वो जानबूझकर सामने वालों को चिढ़ा रहा है। योद्धा का बदला में विलेन का यह किरदार बहुत ही दमदार लग रहा है। उसके चेहरे के हाव-भाव बता रहे हैं कि उसे अपनी जीत का पूरा यकीन है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट आना बाकी है।

तीन बनाम एक का रोमांच

एक तरफ अकेला गंजा योद्धा और दूसरी तरफ तीन सशक्त योद्धा। यह मुकाबला बिल्कुल असमान लग रहा है, लेकिन विलेन के आत्मविश्वास को देखकर लगता है कि वह अकेला ही काफी है। योद्धा का बदला में यह टकराव सबसे बड़ा हाईलाइट बनने वाला है। लाल कालीन पर खड़ा यह दृश्य किसी बड़े युद्ध की शुरुआत लग रहा है।

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