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योद्धा का बदलावां22एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बिस्तर पर बैठे हुए उसकी आँखों में डर था

योद्धा का बदला के इस सीन में लड़की की घबराहट साफ़ दिख रही है। वह बिस्तर पर बैठी है, पजामा पहने हुए, और सामने खड़े आदमी से बात कर रही है। उसकी आवाज़ में कंपन है, जैसे कोई बड़ी बात छिपा रही हो। कमरे का माहौल तनावपूर्ण है, दीवारों पर लगे फ्रेम और खिड़की से आती रोशनी सब कुछ और भी ड्रामेटिक बना रही है।

नीली साड़ी वाली लड़की का एंट्री धमाकेदार

जैसे ही नीली साड़ी वाली लड़की कमरे में आई, सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। उसके बालों में रिबन, चेहरे पर गंभीरता — सब कुछ बता रहा है कि वह कोई मामूली चरित्र नहीं है। योद्धा का बदला में ऐसे मोड़ ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आवाज़ में अधिकार था, जैसे वह सब कुछ जानती हो।

आदमी की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी

वह कुछ नहीं बोल रहा था, बस देख रहा था। उसकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन चेहरे पर शांति। योद्धा का बदला के इस सीन में उसकी चुप्पी ने सबसे ज्यादा तनाव पैदा किया। जब वह धीरे से बिस्तर के पास गया और लड़की का हाथ पकड़ा, तो लगा जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो।

कमरे की दीवारों पर लिखा 'शांति' विडंबना था

दीवार पर लाल रंग में 'शांति' लिखा था, लेकिन कमरे में तो तूफान मचा हुआ था। योद्धा का बदला के इस सीन में यह डिटेिल बहुत गहरी थी। एक तरफ शांति का संदेश, दूसरी तरफ तीन लोगों के बीच चल रहा मानसिक युद्ध। यह विरोधाभास दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।

लड़की के हाथ कांप रहे थे, पर आँखें नहीं

वह डरी हुई थी, हाथ कांप रहे थे, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी दृढ़ता थी। योद्धा का बदला में ऐसे कैरेक्टर ही तो याद रह जाते हैं। जब उसने आदमी की ओर देखा, तो लगा जैसे वह कुछ कहना चाहती हो, पर शब्द गले में अटक गए हों।

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