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योद्धा का बदलावां51एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

मुक्केबाज की अहंकार भरी मुस्कान

वह लड़का जो काले दस्ताने पहने है, उसकी मुस्कान में एक अजीब सा घमंड है। जैसे उसे पता हो कि जीत उसकी ही होने वाली है। लेकिन जब बूढ़ा योद्धा खून थूककर खड़ा होता है, तो माहौल बदल जाता है। योद्धा का बदला देखकर लगता है कि असली ताकत मांसपेशियों में नहीं, इरादों में होती है। यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।

बूढ़े योद्धा का जज्बा

जब वह बूढ़ा आदमी जमीन से उठता है और अपने सीने पर हाथ रखकर खड़ा होता है, तो उसकी आंखों में दर्द नहीं, आग दिखाई देती है। वह हारा नहीं है, बस थोड़ा रुका है। योद्धा का बदला की कहानी में ऐसे पल ही तो जान डालते हैं। उसकी सांसों की आवाज़ और चेहरे का भाव बता रहा है कि अब वह वापसी करेगा।

नीले कोट वाले की चुप्पी

वह व्यक्ति जो नीले कोट में है, वह सब कुछ देख रहा है लेकिन चुप है। शायद वह जानता है कि इस लड़ाई में दखल देना गलत होगा। उसकी आंखों में चिंता है, लेकिन वह हिलता नहीं। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को गहराई देते हैं। वह शायद अगला योद्धा होने वाला है।

लाल पट्टी वाला योद्धा

उसके माथे पर लाल पट्टी है और आंखों में एक अजीब सा जुनून। वह सिर्फ लड़ने नहीं आया, बल्कि कुछ साबित करने आया है। जब वह मुक्का मारता है, तो हवा में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। योद्धा का बदला में उसका किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगता है। वह जीतने के लिए नहीं, सम्मान के लिए लड़ रहा है।

खून और गर्व का मिश्रण

जब बूढ़े योद्धा के मुंह से खून निकलता है, तो वह उसे पोंछता नहीं, बल्कि उसे अपनी ताकत बना लेता है। यह दृश्य दिखाता है कि असली योद्धा दर्द से नहीं डरता। योद्धा का बदला में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आंखों में आंसू नहीं, आग है।

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