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योद्धा का बदलावां19एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लाल किमोनो वाले की हार

योद्धा का बदला में लाल किमोनो पहने शख्स की अकड़ देखकर डर लग रहा था, लेकिन अंत में उसका गिरना संतोषजनक था। ग्रे जैकेट वाले की शांति और आत्मविश्वास ने सबका दिल जीत लिया। तलवार का दृश्य और गुस्से में चिल्लाना बहुत ड्रामेटिक था।

भावनाओं का तूफान

सफेद कपड़ों वाली लड़की की चिंतित आंखें कहानी का असली दर्द बयां कर रही थीं। योद्धा का बदला में हर किरदार का चेहरा इतना एक्सप्रेसिव था कि बिना डायलॉग के सब समझ आ गया। लाल वाले का पागलपन और अंत में जमीन पर गिरना एकदम सही क्लाइमेक्स था।

तलवार और गुस्सा

लाल किमोनो वाले ने तलवार निकाली तो लगा अब खून खराबा होगा, पर ग्रे जैकेट वाले ने बिना हिले सब संभाल लिया। योद्धा का बदला का यह सीन दिखाता है कि असली ताकत हथियार में नहीं, इरादों में होती है। बैकग्राउंड में खड़े लोग भी डरे हुए थे।

शांति बनाम आक्रोश

ग्रे जैकेट पहने युवक की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। लाल वाले का चिल्लाना और पसीना बहना उसकी कमजोरी दिखा रहा था। योद्धा का बदला में यह टकराव सिर्फ मुक्कों का नहीं, सोच का था। अंत में लाल वाला जमीन पर पड़ा तड़प रहा था।

डर का माहौल

हॉल में खड़े सभी लोग सांस रोके देख रहे थे। लाल किमोनो वाले की आवाज से दीवारें कांप रही थीं। योद्धा का बदला के इस सीन में टेंशन इतनी थी कि स्क्रीन के बाहर भी पसीना आ गया। ग्रे जैकेट वाले की आंखों में डर नहीं, जुनून था।

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