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योद्धा का बदलावां47एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तलवार और गर्व की टक्कर

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। गंजा योद्धा अपनी सुनहरी तलवार के साथ जिस अहंकार से खड़ा है, वह देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सामने खड़ा नीली पोशाक वाला नौजवान बिल्कुल शांत है, जैसे तूफान के बीच की आंख हो। योद्धा का बदला की कहानी में यह मुकाबला सबसे यादगार पल बन गया है। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं, कोई डरा हुआ तो कोई गुस्से में। यह सिर्फ लड़ाई नहीं, इज्जत का सवाल है।

अहंकार का अंत निश्चित है

गंजा सैनिक जिस तरह से उंगली दिखाकर धमकी दे रहा है, उससे साफ पता चलता है कि उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड है। लेकिन कहानी का नियम है कि घमंड का अंत बुरा होता है। नीली जैकेट वाला हीरो बिना बोले अपनी आंखों से जवाब दे रहा है। पृष्ठभूमि में खड़े लोग भी इस ड्रामे का हिस्सा बन गए हैं। योद्धा का बदला देखते हुए लगता है कि अब बारी बदलने वाली है। वह लाल पट्टी वाला योद्धा भी किसी बड़े धमाके का संकेत दे रहा है।

खामोशी सबसे बड़ा हथियार

जब दुनिया शोर मचा रही हो और हीरो चुप हो, तो समझ जाओ कि तूफान आने वाला है। इस वीडियो में नीली पोशाक वाले की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। गंजा विलेन बार-बार बोलकर अपनी कमजोरी छिपा रहा है। काली पोशाक वाले बुजुर्ग की चिंतित आंखें सब कुछ बता रही हैं। योद्धा का बदला का यह सीन दिखाता है कि असली ताकत शब्दों में नहीं, इरादों में होती है। माहौल में बिजली सी कौंध रही है।

विलेन की एंट्री धमाकेदार

गंजा विलेन का लुक और उसकी बॉडी लैंग्वेज एकदम खतरनाक है। वह तलवार को ऐसे पकड़े है जैसे वह उसका अंग हो। उसकी आंखों में नफरत और चेहरे पर मुस्कान एक विचित्र संयोजन है। सामने खड़े हीरो की हिम्मत की दाद देनी पड़ती है जो डरे बिना खड़ा है। योद्धा का बदला में ऐसे विलेन ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। पीछे खड़ा काला लिबास वाला शख्स भी रहस्यमयी लग रहा है। यह मुकाबला लंबा चलने वाला है।

इज्जत की जंग का आगाज

यह सिर्फ दो लोगों की लड़ाई नहीं है, यह दो विचारधाराओं का टकराव है। एक तरफ पुराने जमाने का अहंकार है तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी का जज्बा। गंजा योद्धा अपनी पुरानी सोच के साथ खड़ा है जबकि नीला पोशाक वाला नौजवान बदलाव का प्रतीक है। योद्धा का बदला की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है। चेहरों के हाव-भाव देखकर लगता है कि अब बातचीत से काम नहीं चलेगा। लाल कार्पेट पर खून बहने की नौबत आ सकती है।

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