PreviousLater
Close

योद्धा का बदलावां36एपिसोड

like2.0Kchase1.5K

योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद दाढ़ी वाले की धमकी

जिस पल सफेद दाढ़ी वाले ने उंगली उठाई, माहौल में तनाव छा गया। योद्धा का बदला की यह शुरुआत ही इतनी दमदार है कि सांस रुक जाए। नीली पोशाक वाला लड़का डरा नहीं, बल्कि चुनौती स्वीकार करता दिख रहा है। आंखों में आग और चेहरे पर ठहराव - यही तो असली योद्धा की पहचान है। पीछे खड़े लोग भी सांस रोके देख रहे हैं, जैसे कोई बड़ा युद्ध शुरू होने वाला हो।

नीली पोशाक का जवाब

जब नीली पोशाक वाले ने पलटकर जवाब दिया, तो लगा जैसे बिजली गिरी हो। योद्धा का बदला में हर डायलॉग वजनदार है। उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि ठंडा फैसला था। सामने वाले की दाढ़ी हिली, आंखें सिकुड़ीं - यही तो असली एक्टिंग है। बिना चीखे-चिल्लाए भी तनाव बनाए रखना आसान नहीं। यह दृश्य देखकर लगता है कि आगे कुछ बड़ा होने वाला है।

पीछे खड़े लोगों का डर

सिर्फ दो ही नहीं, पीछे खड़े हर चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं। कोई डरा हुआ, कोई उत्सुक, कोई गुस्से में। योद्धा का बदला की यह ताकत है कि हर एक्स्ट्रा भी कहानी का हिस्सा लगता है। जब मुख्य पात्र बात करते हैं, तो पीछे वाले भी सांस रोके सुन रहे हैं। यह छोटा सा डिटेिल ही सीन को जीवंत बना देता है। लगता है जैसे हम भी उसी चौक में खड़े हों।

लाल कार्पेट पर टकराव

लाल कार्पेट पर खड़े दोनों पात्रों के बीच की दूरी ही कहानी कह रही है। योद्धा का बदला में यह सेटिंग बहुत स्मार्ट है - एक तरफ अनुभव, दूसरी तरफ जवानी। दोनों की पोशाक, खड़े होने का तरीका, आंखों का संपर्क - सब कुछ सोच-समझकर डिजाइन किया गया लगता है। जब वे आमने-सामने होते हैं, तो लगता है जैसे दो तूफान टकराने वाले हों।

गुस्से में उठी मुट्ठी

जिस पल नीली पोशाक वाले ने मुट्ठी भींची, लगा जैसे अब कुछ टूटने वाला है। योद्धा का बदला में हर हाव-भाव मायने रखता है। उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि ठंडा इरादा था। सामने वाले की दाढ़ी हिली, होंठ सिकुड़े - यही तो असली ड्रामा है। बिना मारे-पीटे भी तनाव बनाए रखना आसान नहीं। यह सीन देखकर लगता है कि आगे कुछ बड़ा होने वाला है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down