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योद्धा का बदलावां32एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तलवार बनाम खाली हाथ

नीली पोशाक वाले योद्धा का आत्मविश्वास देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सामने तलवार लिए दुश्मन खड़ा है, फिर भी वह बिना हथियार के लड़ रहा है। योद्धा का बदला में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी मुद्रा से साफ पता चलता है कि उसे अपनी जीत पर पूरा भरोसा है।

जापानी सिरियर का अहंकार

वह व्यक्ति जो अपने बालों की शैली से ही अलग पहचान बनाता है, उसका गुस्सा साफ दिख रहा था। उसने तलवार से वार किया लेकिन नीले कपड़ों वाले ने उसे आसानी से रोका। योद्धा का बदला की कहानी में यह टकराव बहुत रोमांचक था। दर्शक भी हैरान थे कि बिना हथियार के कैसे मुकाबला हो रहा है।

काला चक्रवात और शक्ति

जब नीले परिधान वाले ने अपनी शक्ति दिखाई, तो हवा में एक काला चक्रवात सा बन गया। यह दृश्य जादुई लग रहा था। योद्धा का बदला में ऐसे विशेष प्रभाव कहानी को नया मोड़ देते हैं। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वह किसी बड़े रहस्य को जानता हो।

भीड़ की प्रतिक्रिया

लाल कालीन के किनारे खड़े लोग डरे हुए थे। एक व्यक्ति के चेहरे पर खून के निशान थे, जो बताता है कि पहले भी लड़ाई हो चुकी है। योद्धा का बदला में इन छोटे विवरणों ने माहौल को गंभीर बना दिया। सबकी नजरें सिर्फ उसी एक लड़ाई पर टिकी थीं जो अभी होने वाली थी।

बिना हथियार की जीत

तलवारबाजी के सामने खाली हाथों से लड़ना आसान नहीं होता, लेकिन इस योद्धा ने कमाल कर दिया। उसने न केवल वार रोके बल्कि हमलावर को बेबस भी कर दिया। योद्धा का बदला का यह दृश्य साबित करता है कि असली ताकत हथियारों में नहीं, हुनर में होती है। अंत में दुश्मन घुटनों पर गिर गया।

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