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योद्धा का बदलावां12एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

मुक्केबाजी का असली मजा

जब सफेद कुर्ते वाला योद्धा जमीन पर गिरा और खून की उल्टियां करने लगा, तो लगा कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। ग्रे जैकेट वाले शख्स की आंखों में जो ठंडक थी, वो किसी विलेन से कम नहीं लग रही थी। योद्धा का बदला की यह शुरुआत काफी धमाकेदार है, जहां हर फ्रेम में तनाव साफ झलक रहा है। दर्शक के रूप में मैं बस यही चाहूंगा कि अगले एपिसोड में इस बदले की आग और भी तेज हो।

सजावट और माहौल की तारीफ

इस दृश्य की सेटिंग देखकर ही पता चलता है कि निर्माताओं ने मेहनत की है। लकड़ी की छत, पीछे लटके झंडे और फर्श पर बिछे चटाई जैसे विवरण कहानी को एक पुराने जमाने का अहसास देते हैं। जब पीछे से लोग दौड़ते हुए आए और हथियार दिखाए, तो माहौल एकदम युद्ध के मैदान जैसा हो गया। योद्धा का बदला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हम किसी ऐतिहासिक ड्रामे का हिस्सा बन गए हैं, जो काफी रोमांचक अनुभव है।

नीली पोशाक वाली महिला का गुस्सा

जिस महिला ने नीली पोशाक पहनी थी और उसके बाल दो गुच्छों में बंधे थे, उसका गुस्सा देखकर डर लग रहा था। जब वह चिल्लाई और अपनी मुट्ठियां भींच लीं, तो लगा कि वह अगले ही पल किसी पर टूट पड़ेगी। उसकी आवाज में जो दम था, उसने पूरे हॉल को हिला कर रख दिया। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं, जो दर्शकों को अपनी सीट से हिलने नहीं देते।

जापानी समुराई की एंट्री

अंत में जब लाल कुर्ते वाला समुराई तलवार लेकर एंट्री लेता है और उसके पीछे फूलों की पंखुड़ियां गिरती हैं, तो सीन काफी सिनेमेटिक लग रहा था। धुएं और रोशनी का खेल देखकर लगा कि अब कहानी में कोई बड़ा विलेन आ गया है। उसकी चाल और चेहरे का भाव बता रहे थे कि वह आसान दुश्मन नहीं है। योद्धा का बदला का यह क्लाइमेक्स सेटअप दर्शकों को अगले भाग के लिए बेताब कर देता है।

माफी मांगने का ड्रामा

जब जख्मी योद्धा ने हाथ जोड़कर माफी मांगनी शुरू की और उसके मुंह से खून बह रहा था, तो स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। उसकी आंखों में डर और लाचारी साफ दिख रही थी। सामने खड़े लोग उसकी बात सुनने को तैयार नहीं लग रहे थे, जो इस बात का संकेत है कि उसने कोई बहुत बड़ी गलती की है। योद्धा का बदला में ऐसे इमोशनल पल कहानी की गहराई को बढ़ाते हैं।

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