बूढ़े योद्धा के मुंह से खून टपकता है, फिर भी वह जमीन से उठकर खड़ा होता है। उसकी आंखों में हार नहीं, बल्कि बदले की आग जल रही है। युवा प्रतिद्वंद्वी की मुस्कान देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। योद्धा का बदला की यह शुरुआत किसी आम लड़ाई से बिल्कुल अलग है, जहां हर नजर एक चुनौती बन जाती है।
नीले कपड़ों वाला युवक मंच पर ऐसे खड़ा है जैसे पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में हो। उसकी शांत मुस्कान के पीछे छिपी क्रूरता डरावनी है। जब बूढ़ा योद्धा उठता है, तो लगता है कि अब असली खेल शुरू होगा। योद्धा का बदला में दिखाया गया यह अहंकार दर्शकों को बांधे रखता है।
जैसे ही बूढ़े योद्धा ने उंगली उठाई, पूरी भीड़ में सनसनी फैल गई। सबकी आंखों में हैरानी और गुस्सा साफ दिख रहा था। यह दृश्य बताता है कि यह लड़ाई सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के सम्मान की है। योद्धा का बदला का यह मोड़ बहुत ही रोमांचक है।
बूढ़े योद्धा का हाथ बढ़ाना और युवा को चुनौती देना, यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है। चेहरे पर खून होने के बावजूद उसका आत्मविश्वास टूटा नहीं है। सामने खड़ा युवक भी कम नहीं लग रहा, उसकी आंखों में भी जंग की चमक है। योद्धा का बदला में यह टकराव देखने लायक है।
लाल कपड़े से ढका मंच अब रणभूमि लग रहा है। चारों तरफ खड़े लोग सांस रोके इस मुकाबले को देख रहे हैं। हवा में तनाव इतना गाढ़ा है कि उसे छूा जा सकता है। योद्धा का बदला का यह दृश्य बताता है कि कैसे एक छोटी सी घटना बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।