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योद्धा का बदलावां29एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खूनी दाढ़ी वाला बूढ़ा कौन है

योद्धा का बदला में यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। दाढ़ी वाले बूढ़े के मुंह से खून टपक रहा है फिर भी वह इतना शांत कैसे खड़ा है? उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है जो बताती है कि असली खेल तो अब शुरू होगा। नीली जैकेट वाला लड़का भी कम नहीं, उसकी मुस्कान में छिपा है खतरनाक इरादा।

लाल कालीन पर खूनी नाटक

इस दृश्य का परिवेश ही कमाल की है। लाल कालीन, पीछे लटके लालटेन और बीच में खड़ा वह शख्स जिसके होंठों से खून बह रहा है। योद्धा का बदला की कहानी में यह मोड़ बहुत ही नाटकीय है। काले कोट वाले युवक की आवाज में गुस्सा साफ झलक रहा है, लगता है बदले की आग अब भड़कने वाली है।

नीली जैकेट वाला नायक या खलनायक

नीली जैकेट पहने इस किरदार का भाव देखकर हैरानी होती है। जब सब लोग गुस्से में हैं, यह इतना शांत क्यों है? योद्धा का बदला में शायद यह सबसे खतरनाक खिलाड़ी साबित हो। उसकी आंखों में एक अलग ही चालाकी है जो बताती है कि वह सब कुछ जानबूझकर कर रहा है।

गुस्से में उबलता युवक

काले कोट और स्लेटी कुर्ते वाले युवक का गुस्सा देखकर लगता है जैसे वह अभी किसी को खा जाएगा। उसकी आवाज और चेहरे के भाव इतने तीखे हैं कि सामने वाले की हिम्मत जवाब दे जाए। योद्धा का बदला के इस दृश्य में तनाव इतना है कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।

बूढ़े की खामोश ताकत

दाढ़ी वाले बूढ़े का किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगा। मुंह से खून बह रहा है लेकिन वह डरा नहीं, उल्टा उंगली उठाकर कुछ कह रहा है। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को नई दिशा देते हैं। उसकी आवाज में जो दम है वह युवाओं को भी शर्मिंदा कर दे।

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