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योद्धा का बदलावां61एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

ताकतवर दुश्मन के सामने डर नहीं

जब गंजा योद्धा अपनी तलवार लेकर आया, तो सबकी सांसें रुक गईं। लेकिन नायक और नायिका ने हार नहीं मानी। उनके बीच का प्यार और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। योद्धा का बदला देखकर लगता है कि असली जीत तलवार से नहीं, दिल से होती है। दृश्य इतने तीव्र थे कि मैं भी अपनी सीट से उठ खड़ा हुआ।

जादुई तलवार का रहस्य

वह तलवार सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि एक श्रापित वस्तु लग रही थी। जब उसने हमला किया, तो हवा में आग और धुएं के गोले उड़ने लगे। लेकिन नायक ने अपनी बुद्धिमत्ता से उसका सामना किया। योद्धा का बदला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई का संघर्ष है।

प्यार की ताकत से हारा दुश्मन

जब नायक और नायिका ने एक-दूसरे का हाथ थामा, तो उनकी आंखों में डर नहीं, बल्कि एक अटूट विश्वास था। यही विश्वास उन्हें उस गंजे योद्धा के सामने खड़ा रखता है। योद्धा का बदला में यह दृश्य सबसे भावुक था। लगता है कि प्यार ही वह अस्त्र है जो किसी भी दुश्मन को हरा सकता है।

एक्शन से भरपूर दृश्य

हर फ्रेम में एक्शन और ड्रामा का ऐसा मिश्रण था कि आंखें नहीं हटा सका। गंजे योद्धा की तलवारबाजी और नायक की फुर्ती देखकर लगता है कि यह फिल्म एक्शन प्रेमियों के लिए एक दावत है। योद्धा का बदला में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मन करता है।

नायक की बुद्धिमत्ता की दाद

जब सब कुछ खत्म होता लग रहा था, तब नायक ने अपनी बुद्धिमत्ता से स्थिति को संभाला। उसने तलवार को नहीं, बल्कि दुश्मन की कमजोरी को निशाना बनाया। योद्धा का बदला में यह दृश्य सबसे प्रभावशाली था। लगता है कि असली ताकत शारीरिक नहीं, बौद्धिक होती है।

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