यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए! सफेद कुर्ता पहने वह शख्स इतना घमंडी लग रहा है जैसे पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में हो। लेकिन सामने खड़ी उस लड़की की आँखों में डर नहीं, बल्कि आग है। योद्धा का बदला की यह कहानी बताती है कि असली ताकत शोर में नहीं, खामोशी में होती है। जब वह लड़का लॉलीपॉप चूसते हुए सब देख रहा है, तो समझ जाओ कि असली खेल अब शुरू होने वाला है।
सबकी नज़रें उस सफेद पोशाक वाली लड़की और गुस्सैल आदमी पर हैं, लेकिन मेरा ध्यान उस लड़के पर गया जो बीच में खड़ा मजे से लॉलीपॉप खा रहा है। योद्धा का बदला में यह किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी लग रहा है। जब बाकी सब चीख रहे हैं, तो यह शांत है। अक्सर फिल्मों में जो सबसे शांत होता है, वही सबसे खतरनाक होता है। इसकी चुप्पी में कोई बड़ा तूफान छिपा है, मेरा अनुमान कभी गलत नहीं जाता।
उस सफेद कुर्ते वाले आदमी का गुस्सा देखकर लगता है जैसे वह अभी किसी को खा जाएगा। उसकी आँखों में नफरत और चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान है जो डरावनी लग रही है। योद्धा का बदला के इस सीन में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस लेना मुश्किल हो रहा है। वह बार-बार अपनी छाती पीट रहा है और चिल्ला रहा है, शायद उसे अपनी हार का अहसास हो रहा है। ऐसे विलेन से पाला पड़ना किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।
वह लड़की साधारण सफेद पोशाक में है, लेकिन उसका तेज किसी तलवार से कम नहीं है। जब वह उंगली उठाकर कुछ कहती है, तो सामने वाले का घमंड चूर-चूर हो जाता है। योद्धा का बदला में महिला किरदारों को इतना मजबूत दिखाया गया है कि मजे आ गए। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है जो बता रही है कि वह हारने वालों में से नहीं है। ऐसे किरदार देखकर गर्व महसूस होता है।
वह आदमी बार-बार इधर-उधर देख रहा है, जैसे वह किसी चीज को ढूंढ रहा हो जो उसे नहीं मिल रही है। उसकी बेचैनी साफ झलक रही है। योद्धा का बदला की कहानी में यह मोड़ बहुत दिलचस्प है। शायद वह किसी पुरानी याद या किसी खोई हुई चीज के पीछे पागल हो गया है। जब इंसान अपने अतीत से भागता है, तो वह ऐसे ही व्यवहार करता है। इस किरदार की गहराई को समझने के लिए और एपिसोड देखने होंगे।