सफेद बालों वाले मास्टर की एंट्री देखकर ही रोंगटे खड़े हो गए। जब वो लाल कालीन पर उतरे, तो उनकी आँखों में एक अलग ही आग थी। दुश्मन के सामने झुकने से इनकार करना और फिर उस तलवार को तोड़ना, ये सब देखकर लगता है कि योद्धा का बदला अब बहुत करीब आ गया है। उनकी मुद्रा में जो गरिमा थी, वो किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लग रही थी।
जब जापानी योद्धा ने अपनी तलवार निकाली और कागज पर रखी, तो सबकी सांसें थम गईं। लेकिन असली चौंकाने वाला पल तब आया जब सफेद बालों वाले मास्टर ने बिना हथियार के उस तलवार को तोड़ दिया। ये सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि सालों की तपस्या का नतीजा था। योद्धा का बदला की कहानी में ये सीन हमेशा याद रहेगा।
चारों तरफ खड़ी भीड़ का गुस्सा साफ दिख रहा था। सब चिल्ला रहे थे, हाथ हिला रहे थे, लेकिन मास्टर बिल्कुल शांत खड़े थे। ये कंट्रास्ट बहुत गजब का था। लगता है जैसे वो जानते हों कि अंत में जीत किसकी होगी। योद्धा का बदला में ऐसे इमोशनल मोमेंट्स ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
लाल कालीन पर जब लड़ाई शुरू हुई, तो हर वार जानलेवा लग रहा था। जापानी योद्धा की तलवार और मास्टर की खाली मुट्ठियां, ये मुकाबला असमान था। फिर भी मास्टर ने हार नहीं मानी। जब वो जमीन पर गिरे और खून बहा, तो दिल दहल गया। योद्धा का बदला की ये लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक भी थी।
भीड़ में खड़ा नीले कोट वाला युवक सबसे अलग लग रहा था। वो न तो चिल्ला रहा था, न ही हिल रहा था। बस चुपचाप सब देख रहा था। उसकी आँखों में एक गहराई थी, जैसे वो कुछ बड़ा सोच रहा हो। शायद योद्धा का बदला की असली कहानी इसी युवक के इर्द-गिर्द घूमती है। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।