इस दृश्य में मंच पर खड़ा बूढ़ा योद्धा अपनी आवाज़ और हाव-भाव से सबको डरा रहा है। उसकी आँखों में गुस्सा और चेहरे पर पसीना साफ दिख रहा है। सामने खड़ा युवक शांत है, लेकिन उसकी मुट्ठियाँ भिंची हुई हैं। योद्धा का बदला की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा तनावपूर्ण लगता है। दर्शक भी साँस रोके देख रहे हैं।
युवक जो नीले कुर्ते में है, वह कुछ नहीं बोल रहा, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ कह रही हैं। वह बूढ़े योद्धा की हर हरकत को गौर से देख रहा है। जब बूढ़ा चिल्लाता है, तो युवक के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी चुप्पी सबसे बड़ा हथियार है।
काले लिबास में खड़ा आदमी बाँहें बाँधे खड़ा है, लेकिन उसकी आँखों में खतरा साफ झलक रहा है। वह बूढ़े योद्धा की बात सुन रहा है, लेकिन उसका चेहरा बता रहा है कि वह जल्द ही कुछ करने वाला है। योद्धा का बदला में ऐसे किरदार हमेशा कहानी में मोड़ लाते हैं। उसकी मौजूदगी ही डर पैदा करती है।
लाल रंग का मंच और ऊपर लटके लालटेन इस दृश्य को और भी नाटकीय बना रहे हैं। बूढ़ा योद्धा जब चिल्लाता है, तो लगता है जैसे मंच भी काँप उठा हो। योद्धा का बदला में ऐसे दृश्य दर्शकों को बाँधे रखते हैं। रंगों का इस्तेमाल भावनाओं को बढ़ावा देता है। लाल रंग गुस्से और खतरे का प्रतीक है।
बूढ़े योद्धा की आवाज़ इतनी तेज़ है कि लगता है पूरा आँगन गूँज उठा हो। वह अपने हाथों से इशारे कर रहा है और हर शब्द पर जोर दे रहा है। योद्धा का बदला में ऐसे संवाद दर्शकों के दिल में उतर जाते हैं। उसकी आवाज़ में दर्द और गुस्सा दोनों है। वह किसी से बदला लेने की बात कर रहा है।