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योद्धा का बदलावां53एपिसोड

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योद्धा का बदला

अरुण का परिवार मारा गया, वह गिरकर याददाश्त खो बैठा और राधा के अखाड़े में पला। पंद्रह साल बाद उसने देशद्रोही राकेश को हराया, अपनी असली पहचान बताई। राधा ने काला ताबीज़ की विद्या सीखी। अरुण ने दुश्मनों को मात देकर षड्यंत्र खोला। आखिर में दोनों ने सरगना को मार गिराया। सबने अरुण को संघ का अध्यक्ष चुन लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अचानक सुई का डर

जब उस लड़के ने जमीन पर पड़े योद्धा को सुई से इंजेक्शन दिया, तो मेरी सांसें रुक गईं। यह दृश्य इतना तनावपूर्ण था कि लग रहा था जैसे कोई गलत हो गया हो। फिर वह लड़का अचानक उठ खड़ा हुआ और पागलों की तरह मुक्केबाजी करने लगा। योद्धा का बदला में ऐसे मोड़ की उम्मीद नहीं थी। दर्शकों के चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी चीज पूरे खेल को बदल सकती है।

सामुराई की धमकी

वह गंजा सामुराई तलवार लेकर खड़ा था और उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। जब उसने अपनी बांहें फैलाईं और चिल्लाया, तो लगा जैसे वह किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहा हो। योद्धा का बदला में इस किरदार का प्रभाव बहुत गहरा है। उसकी पोशाक और हावभाव से लगता है कि वह किसी पुराने युग का योद्धा है। उसके सामने खड़े लोग डरे हुए लग रहे थे। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय था।

नीले कोट वाले की शांति

बाकी सभी लोग घबराए हुए थे, लेकिन नीले कोट वाला युवक बिल्कुल शांत खड़ा था। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह सब कुछ जानता हो। जब वह लड़का पागलों की तरह मुक्के मार रहा था, तो वह बस देखता रहा। योद्धा का बदला में इस किरदार की शांति सबसे अलग लगती है। शायद वह जानता था कि आखिर में क्या होने वाला है। उसका यह व्यवहार दर्शकों को भी हैरान कर देता है।

लाल पट्टी वाला पागल

जिस लड़के के सिर पर लाल पट्टी बंधी थी, वह इंजेक्शन के बाद बिल्कुल बदल गया। उसकी आंखें फैल गईं और वह पागलों की तरह चिल्लाने लगा। उसने मुक्केबाजी के दस्ताने पहने थे और वह हवा में मुक्के मार रहा था। योद्धा का बदला में यह दृश्य सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था। लगता था जैसे उसे किसी नेंत्रिक नियंत्रण में ले लिया गया हो। उसके हावभाव इतने अतिरंजित थे कि दर्शक हंस भी रहे थे और डर भी रहे थे।

भीड़ की प्रतिक्रिया

जब वह लड़का उठ खड़ा हुआ, तो आसपास खड़े सभी लोगों के चेहरे पर हैरानी थी। कुछ लोग पीछे हट रहे थे, तो कुछ आगे बढ़कर देख रहे थे। एक बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी। योद्धा का बदला में भीड़ की प्रतिक्रियाएं भी कहानी का हिस्सा बन जाती हैं। उनकी आवाजें और हावभाव इस बात का संकेत देते हैं कि यह सब कुछ अप्रत्याशित था। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक घटना पूरे माहौल को बदल देती है।

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