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प्रतिशोध की डोरवां11एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कैंची की आवाज़ ने सबको हिला दिया

जब उसने कैंची निकाली तो मुझे लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। गुलाब की कढ़ाई पर वार करना सिर्फ कपड़े को नहीं, बल्कि उसकी इज्जत को चीरना था। प्रतिशोध की डोर में यह दृश्य सबसे ज्यादा तनावपूर्ण था। सबकी सांसें रुक गई थीं जब धागे कटने की आवाज़ आई। यह बदला इतना खूबसूरत और दर्दनाक कैसे हो सकता है?

गुलाब की कढ़ाई का दर्द

उस लाल कपड़े के नीचे छिपा हुआ तोहफा देखकर सब हैरान थे, लेकिन असली झटका तो तब लगा जब वह कैंची लेकर आगे बढ़ी। इतनी नाजुक कढ़ाई को काटना किसी कलाकृति को नष्ट करने जैसा था। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला था। उसकी आंखों में जो ठंडक थी, वह किसी भी चीख से ज्यादा डरावनी थी।

बदले की आग में जली कढ़ाई

पार्टी के माहौल में अचानक यह हिंसा देखकर सब स्तब्ध रह गए। उसने बिना एक शब्द कहे, बस अपनी कैंची से सब कुछ साफ कर दिया। प्रतिशोध की डोर में दिखाया गया यह गुस्सा बहुत ही गहरा था। जब वह कढ़ाई को काट रही थी, तो लग रहा था कि वह अपने अतीत के हर दर्द को काट रही है। यह दृश्य बहुत ही तीव्र था।

खामोश चीखें और कटी हुई डोर

जब उसने कैंची चलाई, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। प्रतिशोध की डोर में यह दृश्य बताता है कि कैसे एक पल में सब कुछ बदल सकता है। उस कढ़ाई में जो मेहनत थी, वह पल भर में बर्बाद हो गई। यह बदला बहुत ही क्रूर लेकिन संतोषजनक लगा। देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

सुंदरता के पीछे छिपा जहर

शुरुआत में सब कुछ इतना खूबसूरत लग रहा था, साड़ियां, गहने और हंसी-मजाक। लेकिन फिर अचानक माहौल बदल गया। प्रतिशोध की डोर में यह मोड़ बहुत ही अप्रत्याशित था। जब उसने कैंची निकाली, तो पता चला कि यह पार्टी नहीं, एक अदालत है जहां सजा सुनाई जा रही है। उस कढ़ाई का कटना बहुत दर्दनाक था।

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