सफेद क्विपाओ पहने वह लड़की जब कमरे में दाखिल हुई, तो ऐसा लगा जैसे किसी तूफान का आगाज हो गया हो। उसकी आँखों में वो ठंडक थी जो सीधे दिल में उतर जाती है। सामने बैठे परिवार वाले हैरान थे, लेकिन वह बिल्कुल शांत थी। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य ही तो जादू करते हैं जहाँ खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। उसकी हर अदा में एक रहस्य छिपा था जो देखने वाले को बांधे रखता है।
कमरे का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सांस लेना भी मुश्किल लग रहा था। नीली ड्रेस वाली महिला का गुस्सा साफ झलक रहा था, जबकि गुलाबी पोशाक वाली लड़की डरी हुई लग रही थी। बीच में बैठा वह आदमी सब कुछ चुपचाप देख रहा था, जैसे किसी बड़े फैसले की प्रतीक्षा हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में ये छोटे-छोटे इशारे बड़े धमाके का संकेत देते हैं। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे जो कहानी को और भी दिलचस्प बना रहे थे।
जब वह लड़का कार में बैठा लाइटर जला रहा था, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। लाइटर की छोटी सी आग उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जो उसके अंदर के संघर्ष को दिखा रही थी। शायद वह उस लड़की के बारे में सोच रहा था जो अभी-अभी उस घर से निकली थी। प्रतिशोध की डोर में ऐसे सीन बहुत गहराई से जुड़े होते हैं जहाँ बिना डायलॉग के ही सब कुछ कह दिया जाता है। उसकी चुप्पी में एक बड़ा राज छिपा था।
सफेद क्विपाओ वाली लड़की और गुलाबी ड्रेस वाली लड़की के बीच का अंतर सिर्फ कपड़ों का नहीं, बल्कि उनके इरादों का भी था। एक की आँखों में ठंडक थी तो दूसरी की आँखों में डर। जब वे एक-दूसरे को देखती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे दो दुनिया आमने-सामने आ गई हों। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदारों का टकराव ही कहानी की जान होता है। हर नजर मिलने पर लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
वह बूढ़ा आदमी जो सोफे पर बैठा सब कुछ देख रहा था, उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसके चेहरे पर झुर्रियां थीं, लेकिन आँखों में एक तेज था जो सब कुछ समझ रहा था। शायद वह इस पूरे ड्रामे का सूत्रधार था। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार अक्सर कहानी को नया मोड़ देते हैं। जब वह बोलता है, तो लगता है कि अब सब कुछ बदलने वाला है। उसकी हर हरकत में एक गहराई थी।