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प्रतिशोध की डोरवां25एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद पोशाक में खतरनाक खूबसूरती

व्हाइट ड्रेस वाली लड़की की आँखों में जो आत्मविश्वास है, वो किसी डर को नहीं जानता। जब वो बोलती है, तो पूरा कमरा चुप हो जाता है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी हर अदा में एक राज छिपा है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

बुजुर्ग साहब का गंभीर चेहरा

सूट पहने उस बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे पर जो गंभीरता है, वो बताती है कि वो किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। उनकी चुप्पी शोर मचा रही है। प्रतिशोध की डोर के इस सीन में तनाव साफ झलकता है। लगता है वो अगली चाल चलने वाले हैं।

काले सूट वाले का गुस्सा

काले सूट वाले आदमी का गुस्सा देखकर लगता है कि वो हार नहीं मानने वाले। उनकी आवाज़ में जो दमखम है, वो कमरे की हवा बदल देता है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे संवाद ही दर्शकों को रोमांचित करते हैं। वो जरूर कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं।

काली साड़ी वाली महिला का रहस्य

काली साड़ी पहनी उस महिला की आँखों में एक अलग ही चमक है। वो फोन पर बात करके कुछ प्लान बना रही हैं। प्रतिशोध की डोर में ऐसे किरदार कहानी में ट्विस्ट लाते हैं। उनकी हर हरकत संदेह पैदा करती है।

कांच के कमरे का माहौल

कांच के कमरे में बैठे सभी पात्रों के बीच जो तनाव है, वो दर्शकों को भी बेचैन कर देता है। प्रतिशोध की डोर का यह सीन बताता है कि यहाँ कुछ बड़ा होने वाला है। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं।

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