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प्रतिशोध की डोरवां38एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बेटे की बेबसी और बाप का गुस्सा

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। जब बुजुर्ग व्यक्ति लाठी टेकते हुए कमरे में दाखिल होते हैं, तो माहौल एकदम बदल जाता है। युवक का चेहरा देखकर लगता है कि वह किसी बड़े संकट में फंस चुका है। प्रतिशोध की डोर कहानी में यह मोड़ बहुत ही नाटकीय है, जहां एक पिता का गुस्सा और बेटे की मजबूरी साफ झलकती है। बॉडीगार्ड्स की मौजूदगी स्थिति को और भी गंभीर बना देती है।

सफेद पोशाक वाली लड़की का रहस्य

शुरुआत में जो लड़की सफेद पोशाक में जमीन पर बैठी थी, उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। जब वह कार में फोन करती है, तो लगता है कि वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। उसका शांत रहना और फिर अचानक फोन उठाना संदेह पैदा करता है। प्रतिशोध की डोर में किरदारों के बीच का यह खेल बहुत ही रोचक है। क्या वह युवक की मदद कर रही है या उसके खिलाफ साजिश रच रही है? यह सवाल दर्शकों के दिमाग में बना रहेगा।

काले सूट वाला युवक और उसकी मजबूरी

काले सूट में सजा यह युवक शुरू में बहुत आत्मविश्वासी लग रहा था, लेकिन जैसे ही बुजुर्ग व्यक्ति आए, उसका सारा घमंड टूट गया। उसकी आंखों में डर और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी। जब वह बिस्तर पर बैठकर सिर पकड़ लेता है, तो दर्शक के रूप में हमें उसकी पीड़ा महसूस होती है। प्रतिशोध की डोर में इस किरदार की यात्रा बहुत ही दर्दनाक लग रही है। क्या वह इस दबाव से बच पाएगा या हार मान लेगा?

कमरे का माहौल और तनाव

इस दृश्य का सेट डिजाइन बहुत ही शानदार है। सफेद पर्दे, नरम रोशनी और आधुनिक फर्नीचर सब कुछ बहुत अमीराना लग रहा है। लेकिन इस खूबसूरती के पीछे छिपा तनाव और भी गहरा है। जब चारों तरफ बॉडीगार्ड्स खड़े हो जाते हैं, तो लगता है कि यह कमरा अब एक पिंजरा बन गया है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर कोने से खतरे का अहसास होता है।

बुजुर्ग व्यक्ति का रौबदार किरदार

लाठी के सहारे चलने वाले इस बुजुर्ग व्यक्ति की एक अलग ही छवि है। उनकी आंखों में गुस्सा और आवाज में दबदबा साफ झलकता है। जब वे युवक से बात करते हैं, तो लगता है कि वे किसी बड़े फैसले के कगार पर हैं। उनकी पोशाक और गहने उनकी हैसियत बताते हैं। प्रतिशोध की डोर में यह किरदार कहानी की रीढ़ की हड्डी लगता है। उनका हर डायलॉग वजनदार और असरदार है।

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