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प्रतिशोध की डोरवां34एपिसोड

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प्रतिशोध की डोर

लोहित राजवंश की बेटी आधुनिक युग में सौतेली माँ द्वारा निर्वासित 'मीनाक्षी चतुर्वेदी' के रूप में पुनर्जन्म लेती है। दो वर्ष पश्चात् स्वार्थी चतुर्वेदी परिवार उसे विवाह के लिए बुलाता है। अब JS — विश्व प्रसिद्ध कढ़ाई कलाकार बन चुकी मीनाक्षी 'चतुर्वेदी समूह' पर अधिकार पाने के लिए मायाजाल रचती है। प्रतिशोध के इस समर में 'जितेश बंसल' का निश्छल प्रेम उसके अंतर्मन को जीत लेता है। अंततः मीनाक्षी प्रतिशोध संग अपना सच्चा प्रेम भी पा लेती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद सूट में रोमांस

इस दृश्य में सफेद सूट पहने पुरुष का आकर्षण और महिला के प्रति उसकी देखभाल भावना बहुत गहरी है। जब वह उसे गोद में उठाकर ले जाता है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दिल को छू लेता है। कमरे का माहौल और उनकी नज़रों का मिलना जादुई है।

चुप्पी में छिपा प्यार

बिना किसी डायलॉग के सिर्फ आँखों और स्पर्श से इतनी गहरी कहानी कहना आसान नहीं है। पुरुष का चेहरा जब महिला के करीब आता है, तो साँसें रुक सी जाती हैं। प्रतिशोध की डोर के इस एपिसोड में भावनाओं का जो प्रवाह है, वह दर्शकों को बांधे रखता है। बेडरूम का सीन बहुत ही इंटिमेट और खूबसूरत है।

गलियारे का सफर

लंबे गलियारे में उसे गोद में उठाकर ले जाना सिर्फ एक एक्शन नहीं, बल्कि एक वादा है कि वह उसे कहीं भी छोड़ने नहीं देगा। फर्श पर उनका प्रतिबिंब और धीमी चाल इस दृश्य को और भी सिनेमैटिक बनाती है। प्रतिशोध की डोर में ऐसे पल ही तो हैं जो दर्शकों को बार-बार देखने पर मजबूर करते हैं।

नींद में भी साथ

जब वह सो रही होती है और वह उसके पास बैठकर उसे देखता रहता है, तो लगता है कि उसकी दुनिया बस वही है। उसकी नींद में भी उसे सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश बहुत प्यारी लगती है। प्रतिशोध की डोर की यह कहानी रिश्तों की गहराई को बहुत खूबसूरती से दिखाती है।

सफेद रोब में सुकून

बाथरूम से निकलकर सफेद रोब में वह जब वापस आता है, तो उसका चेहरा थका हुआ लेकिन संतुष्ट लग रहा है। यह बदलाव दिखाता है कि वह कितना जिम्मेदार है। प्रतिशोध की डोर के इस किरदार ने मेरा दिल जीत लिया है। उसकी हर हरकत में एक अलग ही मैजिक है।

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